वैशाली की नगर वधु
▪️वैशाली की नगरवधू, आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा रचित एक हिन्दी उपन्यास है जिसकी गणना हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में की जाती है। यह उपन्यास दो भागों में हैं, जिसके प्रथम संस्करण दिल्ली से क्रमशः 1948 तथा 1949 ई. में प्रकाशित हुए।
▪️इस उपन्यास के सम्बन्ध में इसके आचार्य चतुरसेन जी ने कहा था,मेरी अब तक की सारी रचनाओं को रद्द करता हूँ और ‘वैशाली की नगरवधू’ को अपनी एकमात्र रचना घोषित करता हूँ।’
▪️इस उपन्यास का कथात्मक परिवेश ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक है। इसकी कहानी बौद्ध काल से सम्बद्ध है और इसमें तत्कालीन लिच्छिवि संघ की राजधानी वैशाली की पुरावधू 'आम्रपाली' को प्रधान चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
▪️आम्रपाली के माध्यम से उस युग के हास-विलासपूर्ण सांस्कृतिक वातावरण को अंकित करने हुए चेष्टा की गयी है।
▪️उपन्यास में घटनाओं की प्रधानता है किन्तु उनका संघटन सतर्कतापूर्वक किया गया है और बौद्धकालीन सामग्री के विभिन्न स्रोतों का उपयोग करते हुए उन्हें एक सीमा तक प्रामाणिक एवं प्रभावोत्पादक बनाने की चेष्टा की गयी है।
▪️उपन्यास की भाषा में ऐतिहासिक वातावरण का निर्माण करने के लिए बहुत से पुराकालीन शब्दों का उपयोग किया गया है।
▪️आचार्य चतुरसेन ने इस उपन्यास की भूमिका में लिखा है कि उन्होंने इस उपन्यास की रचना के लिए दस वर्ष तक आर्य, बौद्ध, जैन और हिन्दुओं के साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन किया।
▪️उनके अनुसार इस उपन्यास का उद्देश्य ‘‘आर्यों के धर्म, साहित्य, राजसत्ता और संस्कृति की पराजय और विभिन्न कुलों की गणतांत्रिक प्रगतिशील संस्कृति की विजय’’ दिखाना है।
▪️यह सन् 1949 की रचना है।
▪️इस उपन्यास में दो जगहों का बुनियादी महत्व है: वैशाली और मगध।
▪️मगध राजतन्त्र का प्रतीक है, साम्राज्य (वादी) है। इसे आर्य प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। राजा की इच्छा ही वहाँ कानून है। उसमें प्रायः अधिकारों की बात की जाती है।
▪️दूसरी तरफ वैशाली है। उसमें गणतंत्र है, चुनी हुई राज्य-परिषद् का मत उसके लिए कानून है। उसमें अक्सर कर्त्तव्यों की बात की जाती है।
▪️उपन्यास वस्तुतः मगध और वैशाली के रूप में साम्राज्य और गणतंत्र के टकराव को रूप देता है।
▪️आचार्य चतुरसेन शास्त्री (26 अगस्त 1891 – 2 फ़रवरी 1960) हिन्दी भाषा के एक महान उपन्यासकार थे। इनका अधिकतर लेखन ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है।
▪️इनकी प्रमुख कृतियां गोली, सोमनाथ, वयं रक्षामः और वैशाली की नगरवधू इत्यादि हैं। 'आभा', इनकी पहली रचना थी।
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नीलिमा पांडेय
प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश, भारत

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