विश्व की प्राचीन सभ्यताएं: नीलिमा पाण्डेय
अर्नाल्ड टॉयन्बी इस ब्रिटिश इतिहासकार ने इतिहास की परिभाषा करते वक्त एक अलग ही नजरिया पेश किया। उसके अनुसार "इतिहास याने मानवी सभ्यता का उदय और अस्त "। इन सभ्यताओं का उदय क्यों होता है? ओ नष्ट कब होती हैं ? और अगर नष्ट होना ही है तो इन सभ्यताओं का उदय क्यों होता? ऐसे सवालों के साथ टॉयन्बी ने सभ्यता केंद्रित इतिहास का सैद्धांतिक विवेचन किया। मानव विकास क्रम में दुनिया में अलग अलग जगह अनेक समृद्ध सभ्यताओं का उदय, विकास, नाश हुआ।
हजारों साल पहले पनपी मेसोपोटेमिया , सुमेर , बैबीलोन , असेरियन, मिस्र, ईरानी (पर्शियन), हड़प्पा, यूनानी, रोमन सभ्यताएं हमे आकर्षित करती हैं। उन सभ्यताओं के पिरामिड्स , समृद्ध नगर, उत्तम व्यापारी मार्ग , मकान , हेल्थ और ड्रेनेज व्यवस्था के साथ उनका राजकारण, समाजकारण, अर्थकारण , संस्कृति , धर्म.. कला , विज्ञान , तंत्रज्ञान के संबंध में जिज्ञासा के साथ , सभ्यताओं के साक्षी अनेक वास्तु और वस्तु अवशेष हमे लुभाते हैं। हमारे पूर्वजों ने यातायात, संज्ञापन के अत्यल्प साधनों से कैसे वास्तु , कला और बाकी क्षेत्रों में उन्नयन किया होगा और क्या पर्यावरणीय विशेषता होगी ? ये सब हम आज जान पायेंगे क्या ऐसे हजारों सवाल मन में आ जाते है।
वक्त के साथ अत्याधुनिक तंत्रज्ञान से हमे इन सवालों के जवाब मिलते है। ये जवाब जानने हमे ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं। नीलिमा पांडे जी और दिनेश तिवारी इन इतिहासविदो ने अपने सखोल अध्ययन से पश्चिम एशिया की सभ्यताओं पर केंद्रित नई किताब प्रकाशित की है "पश्चिमी एशिया में सभ्यता का उदय"। इस किताब में उन्होंने सखोल अध्ययन के साथ सुमेर, बैबीलोन, असिरिया और ईरान की सभ्यताओं के परिचय से शुरू होकर उन सभ्यताओं के राजकीय,अर्थ,समाज,धर्म एवं कला , विज्ञान के साथ अन्य उपलब्धियां को एक व्यापक परिपटल पर हूबहू चित्रण किया है। परिभाषिक शब्दावली के साथ मानचित्र और चित्रफलक के अस्तित्व से किताब अधिक तथ्यपूर्ण हो जाती है।
▪️पुस्तक समीक्षा /©ज्योति पेठकर
असिस्टेंट प्रोफेसर
इतिहास विभागएल जी एम महाविद्यालय
मुंबई विश्वविद्यालय , महाराष्ट्र

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