हिम्बा स्त्रियां और स्नान
▪️ अफ्रीकी के दक्षिण-पश्चिम तट पर स्थित नामीबिया के क्वैनन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की महिलाएं जीवन में केवल एक बार ही स्नान करती हैं। ये ख़ास दिन उनके ब्याह का होता है। ज़ाहिर है ऐसे गरम इलाक़े में बिना नहाए रहना किसी सज़ा से कम नहीं है। लेकिन नहाना तो दूर उन्हें अपने कपड़े धोने की भी इज़ाजत नहीं है।
▪️ऐसा जलवायु और पर्यावरण प्रदत्त बाध्यताओं की वजह से किया जाता है। दरअसल हिम्बा लोग रेगिस्तानी जलवायु और पीने योग्य पानी की अनुपलब्धता के साथ पृथ्वी पर सबसे गर्म वातावरण में से एक में रहते हैं। इसीलिए जल स्नान प्रतिबंधित होने की स्थिति में स्त्रियों ने धूम्र-स्नान का रास्ता निकाल रखा है।
▪️धूम्र-स्नान की व्यवस्था जड़ी-बूटियों को पानी मे उबालकर की जाती है। जड़ी-बूटियों को उबालने की प्रक्रिया में निकलने वाली भाप और धूएं से शरीर को तरोताजा रखा जाता हैं। उबलते हुए जल में भाप की आवृत्ति बढ़ने पर चेहरा और शरीर भाप के हवाले कर ऊपर से कोई मोटा कपड़ा तान लिया जाता है। बन्द घेरे में भाप की सघनता बढ़ने पर शरीर का रोयां-रोयां पसीने में डूब जाता है। पसीने से नहाए बदन को पोछ कर साफ़ कर लिया जाता है।
▪️पानी से साफ़-सफ़ाई की भरपाई के लिए महिलाओं ने एक लेप भी ईज़ाद कर रखा है। मान्यता है कि यह लेप स्त्रियों को खूबसूरत और जवां बनाए रखने में मदद करता है। लेप में जानवरों की चर्बी और लोहे की तरह एक खनिज तत्व, हेमाटाइट, मिला होता है। हेमेटाइट तत्व की उपस्थिति से लगातार लेप लगाने से शरीर का रंग लाल हो जाता है ।
▪️ अपने इस अजीबोगरीब रिवाज़ से हिम्बा जनजाति ने खबरों की दुनियां में ख़ूब सुर्खियां बटोरीं।
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वस्तुतः नामीबिया एक खूबसूरत देश है जो अफ्रीका के दक्षिण पश्चिम तट पर स्थित है। यह शानदार पहाड़ों, मछली, नदी, घाटी, घास के मैदानों और वन्य जीवन से युक्त बेहद लुभावना देश है। अपनी इन विशेषताओं की वजह से नामीबिया एक दिलचस्प पर्यटन स्थल एक रूप में जाना जाता हैं।


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