मुरिया जनजाति में प्रेम

 ये ख़ूबसूरत तस्वीर मुश्ताक़ खान ने उतारी है । तस्वीर में बस्तर क्षेत्र की मुरिया बाला अपनी ख़ास केश-सज्जा के साथ दर्शनीय है। मुरिया जनजाति में कंघी प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। मानवशास्त्रियों ने मुरिया संस्कृति के इस पक्ष का अध्ययन अपने शोध में दर्ज़ कर रखा है। 


तस्वीर देख कर हमें अपनी माँ की पीढ़ी की तमाम स्त्रियाँ याद हो आईं जो अपने लंबे बालों को सुलझाने के साथ-साथ बीच-बीच में कंघे को बाल में खोंस कर गृहस्थी के काम निबटाने लगती थीं।

बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में कंघी का उपयोग प्रेम निवेदन के लिये होता है। कुछ आदिवासी जनजातियों में प्रेम की अभिव्यक्ति के लिये एक नवयुवक एक नवयुवती को बांस से बनी कंघी पेश करता है, जिसे स्वीकार करने पर यह समझा जाता है की उसे युवक का प्रेम निवेदन स्वीकार है।

यहां की  विभिन्न जनजातियों में कंघी की अलग अलग नामों से पुकारा जाता है। माड़िया जाति के लोग पनिया, भतरा जाति में कोकोई और बाईसन हार्न माड़िया कंघी को ईसर कहते है।

________________नीलिमा

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