किताबें जो पढ़ी गयीं : मेरी ज़िंदगी में चेख़व

 लीडिया एविलोव चेखव से चार बरस छोटी थीं। उनका जन्म 1864 में मास्को में हुआ। चेखव से पहली मुलाक़ात के समय उनकी उम्र पच्चीस बरस की थी। उनकी किताब 'चेखव इन माई लाइफ़' चेखव की मृत्यु के कई साल बीत जाने पर प्रकाशित हुई। इस शीर्षक में चेखव के साथ उनकी आठ मुलाक़ातें तफ़सील से दर्ज़ हैं। 

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दिलचस्प तरीके से लिखा गया ये ब्यौरा लगातार 'थोड़ा और..' जान लेने की उत्सुकता जगाए रहता है। इस संस्मरण में लीडिया अपने और चेखव के सम्बंध के बारे में बेहद संजीदगी से तटस्थ होकर बताती चलती हैं। गोया किसी और का ज़िक्र चल रहा हो। यह लीडिया और चेखव के जीवन का एक नितांत व्यक्तिगत अध्याय है जिसने चेखव के व्यक्तित्व को नए सिरे से समझने में मदद की।

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प्रेम की तमाम परिभाषायें और अनुभूतियां साहित्य में दर्ज़ हैं। लीडिया के माध्यम से हम एक नयी अनुभूति से रूबरू होते हैं। प्रेम की एक नई परिभाषा का पाठ पढ़ते हैं।

_______________नीलिमा

(मेरी ज़िंदगी में चेखव : 01)

 


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