▪️उत्तर प्रदेश में ईसाई धर्म का आगमन


 ♦️उत्तर प्रदेश में ईसाई धर्म का प्रवेश

उत्तर प्रदेश में ईसाई धर्म के प्रवेश के बाबत कहा जा सकता है कि मुगल बादशाह अकबर ने ईसाई धर्म की बारीकियों को समझने के लिए गोवा से जेसुइट पादरियों को आगरा आमंत्रित किया। 18 फरवरी 1580 को जेसुइट मिशनरी फादर मेंसोरेट आगरा आए। अकबर ने अपनी जिज्ञासा शांत करने के साथ ही उन्हें ईसाई धर्म के प्रचार की छूट दे दी। यद्यपि मुगल काल मे ईसाईयत का प्रचार बहुत अधिक नहीं हुआ किन्तु सत्रहवीं सदी के अंत तक तकरीबन 400 ईसाईयों की जमात बन गयी थी।  

इतिहास में दर्ज है कि बादशाह अकबर ने आगरा में एक खूबसूरत चर्च भी बनवाया था। यह उस समय का आगरा का इकलौता रोमन कैथोलिक चर्च था। आगरा शहर में ईसाईयों की जनसंख्या सन 1562  से बढ़नी शुरू हुई।  इसके पहले वह काफी कम संख्या में थे। आगरा में बसे ईसाईयों की धार्मिक जरूरतों के मद्देनजर चर्च के निर्माण का आदेश दिया गया। फादर जेसुइट की देख रेख में सन 1599 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ।

बाद में इस चर्च को लेकर मुगलों और पुर्तगालियों में कुछ मतभेद हो गये थे । मतभेद इतने बढ़े कि बादशाह जहाँगीर ने इस चर्च को ध्वस्त करने के आदेश दे दिए। कुछ वर्षों बाद स्थिति सामान्य होने पर शहंशाह के आदेश पर इस चर्च को फिर बनवाया गया। शाहजहां के शासन काल में चर्च को लेकर पुर्तगालियों से फिर रार हुई। शाहजहाँ जब मुगल बादशाह बने उन्होंने पुर्तगालियों की रियासत हुगली पर चढ़ाई कर दी और आगरा चर्च के फादर जुसुईट को बंदी बना लिया। कुछ समय बाद उनको चर्च ध्वस्त करने की शर्त पर रिहा किया गया। हुक्म की तामील हुई नतीजन आगरा का चर्च एक बार फिर ढहा दिया गया। पुनः सन 1636 में शाहजहाँ के ही आदेश पर चर्च फिर से बनवाया गया।  

चर्च के गिरने उठने का क्रम अभी थमा नहीं था। 1748 में यह  अहमद शाह अब्दाली  के कोप का भाजन हुआ। उसकी सेना ने हमले के दौरान चर्च की ईंट से ईंट बजा दी। इस विध्वंस के ग्यारह बरस बाद आगरा के सिविल और मिलिट्री गवर्नर रेन्हार्ट सोम्ब्रे उर्फ़ समरू साहब और फादर वैनडेल ने ईसाई समाज के लोगों की मदद से इस चर्च के ऊपरी हिस्से की मरम्मत कराकर इसे वर्तमान  स्वरूप दिया। इस बात का ज़िक्र गिरजे की दिवार पर अभिलेख के रूप में अंकित है।

आज इसे आगरा के वज़ीरपुरा (कमला नगर सिविल लाइन्स ) क्षेत्र में देखा का सकता है। इसकी पहचान बादशाह अकबर से जुड़ी हुई है। इसे अकबरी चर्च के नाम से पुकारा जाता है।

______________नीलिमा

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