बोदी जनजति का सौंदर्य बोध
अफ्रीका महाद्वीप के इथियोपिया में ओमो वैली के जंगलों में निवास करने वाली बोदी जनजाति की एस्थेटिक्स बिल्कुल अलग है। वहाँ हट्टा-कट्टा , मोटा-ताज़ा , तुन्दीयल पुरुष सुदर्शन माना जाता है। तोंद पर ख़ास ज़ोर होता है। यही वज़ह है कि इस जनजति के पुरुष मोटे होने और तोंद को बढ़ाने के लिए काफी मेहनत करते हैं और तोंद के निमित्त दूध के साथ जानवरों का खून भी पीते हैं।
तोंद पर टिके सौंदर्यशास्त्र की वज़ह से यहां
जो शख़्स सबसे मोटा होता है, उसके साथ नायक जैसा सलूक किया जाता है। सबसे मोटे शख़्स की तलाश में यहां पर एक प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया जाता है। अधिकांश परिवार इस प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हैं। प्रतिभागी होने की अर्हता में मोटापे के साथ कुवांरा होना भी शामिल है। जीतने वाले शख़्स को उसकी मनपसंद लड़की को ब्याहने की आज़ादी रहती है।
बोदी लोग हर साल जून या जुलाई में 'काएल' समारोह मनाते हैं जिससे नए साल की शुरुआत मानी जाती है।
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