▪️दुनिया में औरत : 01

 सौंदर्य बनाम शारीरिक विरूपता के अनेक उदाहरण मिलते हैं । परंपरा और सांस्कृतिक


इतिहास के दायरे में हम इनका पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण देखते हैं । शरीर पर गोदना गुदवाना विरूपता का सर्वाधिक व्यापक उदाहरण है। बहुसंख्यक जनजातियों में स्त्रियों के चेहरे पर गोदना करवाने के उदाहरण मिलते हैं। गोदने के अलावा चीन से लोटस फीट ,  बर्मा की कयान जनजाति की जिराफ स्त्री और भारत के अरुणाचल प्रदेश से नोज प्लग धारण किए तानी स्त्रियों का उल्लेख इस संदर्भ में किया जा सकता है। 


सौंदर्य बनाम शारीरिक विरूपता की इस परंपरा का विस्तार हमें इथियोपिया की सूरी और मुरसी जनजाति में में देखने को मिलता है। इन जनजातियों की स्त्रियां स्वयं को आकर्षक दिखाने के लिए अपने निचले होंठ में मिट्टी की बनी चपटी तश्तरी नुमा आकृति धारण करती हैं। तश्तरी को फंसाने के लिए न सिर्फ़ निचले होंठ को  गोलाई में चीर दिया जाता है बल्कि निचले जबड़े के  सामने से दो या चार दांत भी निकाल दिए जाते हैं। स्त्रियों के होठों को खींचकर बड़ा करने की प्रक्रिया बचपन से ही शुरू कर दी जाती है। 


होठ में फंसी तश्तरी का आकार स्त्री के सौंदर्य के समानुपाती माना जाता है। ऐसी स्त्री का पति सामाजिक रुप से अधिक प्रतिष्ठित और सम्माननीय होने का गौरव प्राप्त करता है। इन जनजातियों में विवाह के समय  वधु - शुल्क चुकाने की परंपरा है। अपने होठों के बीच आकर में बड़ी तश्तरी धारण करने वाली स्त्री से विवाह करने के लिए वर  को अन्य स्त्रियों की तुलना में अधिक शुल्क देना होता है। वधू-शुल्क स्त्री के पिता को चुकाया जाता है। वधु-शुल्क के रूप में मवेशी विशेषकर गाय देने  की परम्परा है।

___________नीलिमा

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