▪️दुनिया में औरत:15

 सभ्यता और संस्कृति के विकास के विभिन्न चरणों से गुज़रते हुए जानकारी मिलती है कि पूरी दुनिया में तरुणाई-उत्सव मनाने की परम्परा रही है। लड़के-लड़कियों के वयस्क होने से जुड़े उद्घोष समारोह के अनेक अध्ययन समाज शास्त्र , मानव शास्त्र और इतिहास के अध्येताओं ने किए हैं। 



प्रत्येक समाज अपने युवाओं को बहुमूल्य निधि की तरह देखता है जिनके ऊपर भविष्य का दारोमदार टिका होता है। इसलिए जैसे ही लड़के-लड़कियां यौवन ही दहलीज पर कदम रखते उनको विभिन्न परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है। परीक्षा का प्रारूप बौद्धिक न होकर  प्रायः शारीरिक प्रताड़ना का होता है।

आमतौर पर पितृ सत्तात्मक मनोवृत्ति के तहत लड़को का शौर्य-बल जांचा जाता है और लड़कियों की सहन शक्ति। धरती के कुछ हिस्सों से इस संदर्भ में दहलाने वाली परम्पराओं की सूचना मिलती है। 

मसलन ब्राजील में रियो नीग्रो नदी के उत्तरी किनारे पर साओ गेब्रियल दा कचोइरा में बसने वाले लोगों में लड़कियों को विवस्त्र कर घर से बाहर सड़क पर बेरहमी से मारा जाता है। क्रूरता की हद की पैमाइश इस बात से की जा सकती है कि इस शारीरिक हिंसा से लड़कियां ज्यादातर बेहोश हो जाती हैं और यदा-कदा मर भी जाती हैं। 

मार बर्दाश्त कर ज़िन्दा बच जाने वाली लड़कियों को स्त्रियोचित गुणों से भरपूर  माना जाता है। 'विवाह-मंडी' में उनकी भरपूर माँग होती है। उनका ब्याह आसानी से हो जाता है। ब्राजील का ये रिवाज़ मासिक-धर्म से जुड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

_________________नीलिमा

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