▪️दुनिया में औरत : 13
वन्नी या स्वरा एक पाकिस्तानी रिवाज़ है।
इस रिवाज़ में नाबालिग लड़कियों को विवाद खात्मे के मुआवज़े के रूप में देने का चलन है।
यह जिरगा नामक आदिवासी बुज़ुर्गों की एक परिषद द्वारा तय की गई सजा का परिणाम है ।
कुछ लोगों का दावा है कि यदि लड़की का कुल पैसा देने के लिए तैयार हो जाता है, तो वन्नी से बचा जा सकता है। इस दी जाने वाली रक़म को दीत कहा जाता है।
आम धरणा है कि यह प्रथा आज से लगभग 400 बरस पहले शुरू हुई थी। इसके मूल में उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान की दो पश्तून जनजातियों के बीच का मन-मुटाव , अहंकार और संघर्ष है। दोनों जनजातियों ने बदले की नीयत से एक-दूसरे के ख़िलाफ़ ख़ूनी युद्ध भी लड़ा था।
जैसा कि अमूमन होता है युद्ध के दौरान तमाम लोग खेत रहे। मामला हाथ ने निकलते देख स्थानीय नवाब ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के बुज़ुर्गों के जिरगा को बुलाकर मामले को सुलझाया। मामला शान्त करने के लिए जो फ़ैसला लिया गया वह निहायत ही हौलनाक था। तय पाया गया कि
मर्दों के विवाद और अपराध की सज़ा के मुआवज़े रूप में उनकी लड़कियों को क़िसास के रूप में दिया जाए।
तब से आदिवासी और ग्रामीण जिरगा 04 से 14 साल की कुंवारी लड़कियों के बाल विवाह के माध्यम से पुरुषों द्वारा किए गए हत्या जैसे अपराधों का निपटारा कर रहे हैं। मर्दों के आपसी बदले और ख़ून-खराबे की इस कार्यवाही में लड़कियों की बलि दी जा रही है। 'ख़ून के बदले ख़ून' या 'आँख के बदले आँख' की यह परंपरा पाकिस्तान के विभिन्न राज्यों जैसे पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान , के पी के और क़बायली इलाक़ों में प्रचलित है।
बहरहाल सन 1973 ईस्वी के संविधान की घोषणा के बाद, पाकिस्तानी की सरकार ने वन्नी प्रथा को गैर-इस्लामी और क्रूर बताते हुए इसे हतोत्साहित करने की दिशा में कदम उठाए।
परम्परा से मुआवज़े के विवाह को बड़े पैमाने पर जनजातियों और परिवारों के बीच शांति बनाए रखने के तरीके के रूप में स्वीकार किया जाता रहा है। हालाँकि, इस तरह से अपने घरों से निकाली गई कम उम्र की लड़कियों के साथ अक्सर व्यवस्थित और संगठित रूप से दुर्व्यवहार किया जाता है। शत्रु परिवार में वे गुलाम सरीखा जीवन जीने के लिए मजबूर होती हैं।
* * *
2008 में, पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में लंबे समय से चल रहे एक ख़ूनी झगड़े का निबटारा तीन से 10 बरस की 15 लड़कियों को सौंपकर सुलटाया गया । झगड़ा एक मरे हुए कुत्ते के मस'अले के साथ शुरू हुआ था। इस मामले में पांच स्त्रियों सहित 19 लोगों की मौत हो गई थी।
(Reference : The Guardian,2008-05-06)
* * *
2012 में, 04 से 16 साल की उम्र की 13 लड़कियों को पाकिस्तान में दो गुटों के बीच हत्या के आरोप के विवाद को सुलझाने के लिए शादी के लिए मजबूर किया गया था। मामले की सुनवाई दो समूहों के बुज़ुर्गों द्वारा की गई, जिसमें बलूचिस्तान राज्य विधानसभा के सदस्य मीर तारिक मसूरी बुगती जिरगा का नेतृत्व कर रहे थे।
( Reference :The express Tribune, 2012-10-09)
* * *
हालांकि 2005 और 2011 के कानूनों ने इस प्रथा को अवैध घोषित कर दिया है। सन 2004 ईस्वी में, सिंध उच्च न्यायालय ने ऐसी सभी "समानांतर न्याय" प्रणालियों को गैरकानूनी घोषित कर दिया। लेकिन ग्रामीण और क़बाइली क्षेत्रों में सरकार के आदेश का क्रियान्वयन कमजोर है।स्थानीय पुलिस ऐसे मामलों में अक्सर आँखे मूंद लेती है।
* * *
वन्नी/वानी /वाणी एक पंजाबी शब्द है जो वणय से बना है जिसका अर्थ होता है ख़ून। इसे पाकिस्तान की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में साक और संगचट्टी के नाम से भी जाना जाता है।अफगानिस्तान में भी ऐसी ही एक प्रथा प्रचलित है जिसे ब'आद कि संज्ञा दी गई है। कहीं-कहीं इसे सवारा के नाम से भी संबोधित किया गया है।
______________नीलिमा
#womenaroundtheworld
#tribes
#स्त्री_13

Comments
Post a Comment