▪️दुनिया में औरत : 05

 अफ्रीका के गिनियन गल्फ में स्थित कैमरून की आबादी  15 मिलियन है । यहां तकरीबन 250 जनजातियां रहती हैं। टोगो, बेनिन और इक्वाटोरिअल गुनिया से सटे इस देश को 'मिनिएचर अफ्रीका' भी कहा जाता है।


एक निहायत ही क्रूर प्रथा के कारण कुछ बरस पहले कैमरून काफी चर्चा में था। इस प्रथा को 'ब्रेस्ट आयरनिंग' की संज्ञा दी जाती है। इसमें किशोरावस्था की शुरुआत होने के साथ ही लड़कियों की छाती को लकड़ी के टुकड़ों से दागा जाता है। 

दागने का उद्देश्य स्तनों के उभार को दबा कर छाती को सपाट बनाना है। इसलिए यह प्रथा ब्रेस्ट फ्लैटनिंग भी कहलाती है।ज्यादातर किशोर लड़कियों के शरीर के साथ यह क्रूरता उनकी माँ या परिवार की अन्य कोई विश्वसनीय स्त्री करती हैं।

इस शारीरिक हिंसा के पीछे दलील यह है कि गर्म लकड़ी से स्तनों को दागने से लड़कियों की छाती चपटी हो जाती है और उन पर पुरुषों की कुदृष्टि नहीं जाती है। 

कैमरून में औरतों का मानना है कि लड़कियों में जवानी के लक्षण दिखाई देने से पुरुष उनकी तरफ़ आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे में लड़कियों के शादी से पहले ही गर्भवती होने का डर बना रहता है।

कैमरून की अधिकतर लड़कियां 09 बरस की उम्र में ब्रेस्ट आयरनिंग की प्रक्रिया से गुज़र चुकी होती हैं। ब्रेस्ट आयरनिंग की यह वीभत्स प्रक्रिया लड़कियों के साथ 02 से 03 महीनों तक लगातार की जाती है। 

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट आयरनिंग के 58 प्रतिशत मामलों में लड़की की माँ ही इसे अंजाम देती है। इस क्रूरता से कैमरून के सभी क्षेत्रों की स्त्रियों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ा है।

ग़ौरतलब है कि अन्य अफ्रीकी देशों की तुलना में कैमरून की साक्षरता दर सबसे अधिक सन् (2003 में 79 %) है । फ़िर भी  यौनिक आकर्षण से बचाने के लिए अपनाई जाने वाली वीभत्स प्रथा ब्रेस्ट आयरनिंग के बावजूद  यहाँ लड़कियों के कम उम्र में गर्भवती होने के मामले निरन्तर सामने आ रहे हैं। 

ब्रेस्ट आयरनिंग अथवा ब्रेस्ट फ्लैटनिंग का उपयोग दुनिया के कुछ आदिम समुदायों द्वारा यौन शोषण और बलात्कार से बचाने के  लिए एक निवारक के रूप में किया जाता है। यौवन को छिपाने के लिए , लड़कियों को बलात्कार और यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए ब्रेस्ट आयरनिंग का दीर्घकालिक  अभ्यास किया जाता है। नाइजीरिया और दक्षिणी अफ्रीका में भी इस प्रथा का आज भी प्रचलन है।

यह काफी हद तक फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन की तरह है जिसमें शादी से पहले कौमार्य और बाद में पति के प्रति वफ़ादारी सुनिश्चित करने के लिए स्त्री-जननांग को हटाना शामिल है।

बहरहाल स्तनों को चपटा करने की कोशिश के तमाम दुष्परिणाम लड़कियों को झेलने पड़ते हैं।  विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्यगत  समस्याओं जैसे कि स्तनों की विषमता, कैंसर, फोड़े, खुजली और दूध के स्राव से उन्हें जूझना पड़ता पड़ता है। सिस्ट, स्तन संक्रमण, बुखार, ऊतक क्षति का भी उन्हें सामना करना पड़ता है।

___________________नीलिमा


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