भारत में ईसाई धर्म : 01


 ♦️ईसाई धर्म का आगमन

भारत में ईसाई धर्म सेंट थामस के माध्यम से आया। उनके भारत आने के संबंध में अनेक किवदंतियां जुड़ी हैं। मालाबारी परंपराओं के अनुसार वह जल मार्ग से सन 50 ईस्वी में भारत आये थे। इस तरह मालाबार क्षेत्र के लोग पहली बार ईसाई धर्म के संपर्क में आए , उससे परिचित हुए।

मालाबारी गीतों में सेंट थामस के द्वारा किये गए अनेक चमत्कारी कार्यों का उल्लेख मिलता है। लगभग 22 वर्षों तक सेंट थामस इस क्षेत्र में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। जब कुछ लोग धर्म में दीक्षित होने लगे तो उनके लिये गिरजाघरों की आवश्यकता महसूस हुई। ये संदर्भ हमें गीत के रूप में संकलित मिलते हैं। गीतों में ये संदर्भ संकलित हैं उन्हें रब्बान पट्टू कहा गया है। गीतों का एक दूसरा समूह भी है जो मरगम काली पट्टू कहलाता है। ये गीत मसीही जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

भारत मे आज भी प्राचीनतम गिरजाघर मालाबार तटीय क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं जो कैथोलिकों के अधिकार में हैं। औपनिवेशिक काल मे पहला आंगलिकन चर्च भी दक्षिण भारत मे मद्रास में बना। सन 1680 में इसे अंग्रेजों ने बनवाया था। इसे हम सेंट मेरी चर्च के नाम से जानते हैं। अंग्रेजों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित होने से पहले इस क्षेत्र में पुर्तगालियों का दखल था। उन्होंने भी ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभाई। पुर्तगालियों द्वारा निर्मित गिरजे भी दक्षिण भारत में देखे जा सकते हैं।

▪️ तस्वीर :  तस्वीर St. Thomas Syro-Malabar Church, Palayur की है। इसे हिंदुस्तान का प्रचीनतम चर्च माना जाता है। यह 52 ईस्वी में बना और त्रिचूर में स्थित है।

______________नीलिमा

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