टोराजन जनजति में मृतक संस्कार:01


 इंडोनेशिया के एक दूरदराज कोने में रहने वाले टोराजन समुदाय में मृतकों को प्राण निकलने के बाद भी अपनी दुनिया में सहेज कर रखने की परम्परा है। 

इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर रहने वाले टोराजन लोगों की मृत्यु को लेकर बहुत अलग मान्यताएं हैं। जब तक उनके समुदाय के किसी मरने वाले के नाम पर एक भैंसे की बलि नहीं दी जाती, तब तक वे उस व्यक्ति को पूरी तरह मृत नहीं मानते। क्योंकि भैंसे को वे मृतक को इस दुनिया से ले जाने वाली सवारी मानते हैं। भैंसे की व्यवस्था तक मृतक के शव को परिवार अपने घर में वैसे ही रखता है जैसे कि वो जिंदा हो। 

इसी समुदाय के कुछ लोग तो मृतकों का दूसरा अंतिम संस्कार भी करते हैं। इसके लिए वे शव को खास तरीकों से सालों साल संभालते हैं। कुछ साल बाद उसे क़ब्र से निकाल कर सफाई की जाती है, नए कपड़े पहनाए जाते हैं और इस तरह वे अपने मृत परिजनों के प्रति सम्मान दिखाते हैं। 

यह ठीक-ठीक नहीं पता कि इस परंपरा की शुरुआत कब से हुई। टोराजन लोगों के लकड़ी के ताबूतों की कार्बन डेटिंग विधि से जांच करने पर पता चला है कि यह परंपरा नौंवी सदी में किसी समय प्रारंभ हुई।

______________नीलिमा

▪️टोराजन 01#tribes

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