किताबें जो पढ़ी गईं : तू-फू
तू-फू °°°° तू-फू की ऐतिहासिक पहचान कवि के रूप में अधिक है। वह राजनीतिज्ञ भी थे। उनका संबंध चीन के तांग वंश से है। समय 712-770 के बीच रखा गया है। राजनीतिज्ञ के रूप में उनकी पहचान कोई खास मकाम हासिल कर सके। नैतिकता और इतिहास को केंद्र में रखकर लिखी गई उनकी कविताओं पर चर्चा जरूर हुई। दूधनाथ जी का एक कहानी संग्रह है , तू-फू नाम से । बाद के दिनों का यह संग्रह साहित्य भंडार , इलाहाबाद से प्रकाशित है। इसमें सन 2000 और उसके आगे-पीछे की लिखी गई कहानियों को संकलित किया गया है । कुछ कहानियां पढ़ी जिनमें से एक 'नपनी' अपने रोचक विशेषण की वजह से याद रह गई। कहानी की जमीन दारुण है। संग्रह की एक और कहानी 'नव्य-न्याय' भी पसंद आई। *** संग्रह की कहानी 'नव्य-न्याय' से : मेरे पास किसी भी बात का कोई उत्तर नहीं था। जैसे किसी भी लेखक के पास नहीं होता। हालांकि लोग चाहते हैं कि उसके पास उत्तर हो। एक लेखक को मारने के लिए सभी 'विद्वान' हो जाते हैं , सभी 'सजेस्ट' करने लगते हैं , सबके तर्क जाग्रत हो जाते हैं, सबके अनुभव उफान मारने लगते हैं , सबकी हिंसा जाग उठती है। लेकिन जो ,'लेखक' है उसके पास कभी उत्तर नहीं होता। वही उसका 'उत्तरदायी' होना है। एक लेखक कृष्ण के विश्वरूपदर्शन में दांतो के बीच फंसा हुआ शव नहीं है। वह ज़िन्दा सबूत है। भीतर की अग्नि क्या है? यानी आत्मा का ताप। या कि जठराग्नि... या...कि सभी कुछ। सारी इंद्रियों की लय का धीरे-धीरे जल उठना। अगर तुम सचमुच एक लेखक होगे तो तुम्हारी यह गति-दुर्गति होगी। *** तू-फू नाम के आकर्षण में छानबीन की तो पाया इतिहास के इस किरदार पर अज्ञेय ने एक कविता भी लिखी है । कविता इस तरह से है : तू-फू को : बारह सौ वर्ष बाद / अज्ञेय पुराने कवि को मुहरें मिलती थीं या जायदाद मनचाही या झोंपड़ी के आगे राजा का हाथी बँधवाने का सन्दिग्ध गौरव, या यश, प्रशंसा, दो बीड़े पान, कंकण, मुरैठा, वाहवाही। या जिसे कुछ नहीं मिलता था उस की सान्त्वना थी बहुत-सी सन्तान भरा-पुरा खानदान हम तुम, दोस्त, नये कवि बेचारे : प्रजातन्त्र में पाते हैं प्रजापत्य विरोधी नारे : दो या तीन बच्चे बस! यह कि हम ने ईजाद किया यही एक नया रस? अज्ञेय ग्वालियर, 15 अगस्त, 1968 तू-फू, चीनी कवि, सन् 713-790 *** फिलहाल किताब हाथ में नहीं है। दी गयी तस्वीर तू-फू की है । उनका समकालीन पोट्रेट नहीं मिलता है। यह एक आर्टिस्टिक इंप्रेशन है जिसे बाद के समय में रचा गया।
__________नीलिमा

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