किताबें जो पढ़ी गईं:सौंदर्य की नदी नर्मदा

 'सौंदर्य की नदी नर्मदा' एक चर्चित यात्रावृत है। इससे अमृतलाल वेगड़ ने रचा है। इसमें नर्मदा के तट की उंगली थामे 2100 किलोमीटर दूरी को पैदल चल कर पूरा करने का ब्योरा हर्फ़ दर हर्फ़ दर्ज है। ब्यौरे की खासियत उसकी लयात्मकता है और वे रूपक हैं जिन्होंने इस लयबद्ध संगीत को सुर दिए हैं। यात्रावृत्त में वेगड़ साहब ने गजब के मेटाफर इस्तेमाल किए हैं।आप उनकी कल्पनाशीलता की दाद दिए बिना नहीं रह सकते। दूसरी महत्वपूर्ण और ध्यान आकर्षित करने वाली बात परिकम्मा (परिक्रमा) को लेकर उनकी आस्था और लक्ष्य केंद्रित उनकी दृढ़ता है। तीसरी अलहदा बात यात्रावृत्त का रेखांकन से सजा-धजा होना है। वस्तुतः नर्मदा मध्य प्रदेश की जीवन-रेखा है। इस यात्रावृत्त को पढ़ते हुए हम उसके महत्व और सौंदर्य में ऐसा सराबोर होते हैं कि यह हम सबकी जीवन-रेखा बन जाती है। शब्दों में पिरोए गए नर्मदा के सौंदर्य के साथ- साथ किए गए रेखांकन नर्मदा तट के जीवन की एक अंतरंग झलक से हमें रूबरू करवाते हैं। चित्रांकन यह बताते हैं अमृतलाल वेगड़ अपने समग्र व्यक्तित्व के साथ परिकम्मा में सनद्ध थे । उन्होंने शांतिनिकेतन से कला की शिक्षा प्राप्त की, चित्रकला के अध्यापक रहे, चित्रकला के लिए 'शिखर सम्मान'(1994-95,मध्यप्रदेश) से सम्मानित हुए। उनकी यह पहली यात्रा 1977 से 1987 के दरम्यान हुई, जिसे उन्होंने दस अंतरालों पर पूरा किया।उनके भीतर का चित्रकार पूरे संस्मरण में शब्द चित्रों और रेखाचित्रों के बीच सामंजस्य बिठाए अपनी उपस्थिति बनाये हुए है। 'सौंदर्य की नदी नर्मदा' नर्मदा नदी के सौंदर्य का शब्द चित्र है । इसे पढ़कर देखी-अनदेखी नर्मदा जानी-पहचानी लगती है। 'दृश्य और दृष्टा की रागात्मकता में पाठक को आत्मीय साझेदारी का आमंत्रण देती इस कृति में साहित्य और चित्र दोनों की विशेषताएं अंतर्गठित हैं।' यहाँ रस में तथ्य है, तथ्य में रस है, सब कुछ निर्झर और सरस है। नर्मदा की यह यात्रा उस 'ढाई आखर' की बानगी है जिसका फलसफा हमें कबीर दे गए हैं । जीवंत अनुभव मोहते हों, यात्राओं में रुचि हो, मिथक रूचते हों , लयात्मक गद्य भाता हो , आमजन से लगाव हो तो जरूर पढ़ें। मुझे यह किताब अपने अलहदा रूपकों के लिए हमेशा याद रहेगी। आप भी रूबरू हों , अच्छा लगेगा। 


________________नीलिमा

(पेंग्विन से प्रकाशित,2006)

Comments

Popular posts from this blog

तीजनबाई और पण्डवानी

🖤 छूटी आदम से जन्नत : लखनऊ रिविजिटेड - 01

विश्व की प्राचीन सभ्यताएं: नीलिमा पाण्डेय