किताबें जो पढ़ी गयीं : रेत की मछली

 लेखक सम्पूर्ण जीवन को अपनी रचना का विषय बनाता है,रचता है। ऐसे लेखक को फिर अपनी रचना का विषय बनाना एक विशेष प्रकार के अनुभव और संवेदनशीलता की अपेक्षा रखता है। कांता जी ने अपने इस उपन्यास 'रेत की मछली' में इस बात का ध्यान रखते हुए लेखकीय जीवन और उसके परिवेश को रचा है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह उपन्यास उनके जीवन से अभिन्न है। लेखकीय जीवन और उसके परिवेश को रेखांकित करती हुई यह किताब जीवन के उतार-चढ़ाव,मानसिक आवेग, आशा-निराशा, कायरता-दृढ़ता, अवसाद-उल्लास के अनेकानेक बिम्बों से भरी हुई है... (कांता भारती को पढ़ते हुए)

_______________नीलिमा


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