बनारस 19
ठाठ बनारस- घाट बनारस :02
एक हिन्दू मान्यता के अनुसार जिस किसी का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर किया जाता है वह सीधे स्वर्ग चला जाता है I यह भी कहा जाता है कि शिव की पत्नी पार्वती के कानों में पहनी जाने वाली मणि इसी जगह गंगा में खो गई थी, जिसके कारण इस घाट का नाम मणिकर्णिका पड़ा I इस घाट पर सदियों से जलती चिताएं कभी नहीं बुझीं I अत: मृत्यु का कारोबार यहाँ चौबीसों घंटे चलता है I सही अर्थों में मृत्यु बनारस का एक बहुत बड़ा ऊद्योग है I अनगिनत पंडों की जीविका मृत्य पर आधारित रहती है I सबसे ज्यादा कमाई उस डोम परिवार की होती है , जिससे हर मुर्दा मालिक चिता सजाने के लिए लकड़ियाँ खरीदता है I यह डोम परिवार उस पौराणिक कथा का अभिन्न अंग बन चुका है , जिसमें उसके पूर्वज के हाथों कभी राजा हरिश्चन्द्र बिक गए थे I डोम के गुलाम के रूप में राजा हरिश्चन्द्र की नियुक्ति मुर्दाघाट की रखवाली के लिए की गई थी I एक घाट आज ‘हरिश्चन्द्र घाट’ के रूप में भी जाना जाता है I इसी मान्यता के कारण लोगों का विश्वास है कि जब तक उस डोम परिवार द्वारा दी गयी लकड़ी से चिता नहीं सजाई जाएगी , तब तक स्वर्ग नहीं मिलेगा I
- मणिकर्णिका
#नज़रभबनारस
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तस्वीर:सुरेंद्र पटेल
_________________नीलिमा

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