बनारस 18
ठाठ बनारस-घाट बनारस :01
बनारस गंगा का शहर है I शहर की रौनक है गंगा, उसकी जीवन-रेखा Iगंगा किनारे उसके घाटों पर न जाने कितने किस्से गढ़े गए I कुछ वृतान्त बने , कुछ नज़ीर में ढल गए और तमाम मिट गए I जीवन की सरगम का आरोह-अवरोह अपने आप में समेटे गंगा के घाट बेहद ख़ास हैं I ये शहर का साज हैं, शहर को इनपर नाज़ है I लगभग चौरासी घाट हैं इस शहर में I कुछ ख़ास हैं, बाकी का आम होना ही उन्हें ख़ास बना देता है I कौन सा घाट हमारे जेहन में सबसे पहले उभरेगा इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे विचार की शृंखला किस दिशा में तरंगित है I अस्सी, दशाश्व्मेध, मणिकर्णिका ,पंचगंगा और आदि–केशव को प्राचीन साहित्य में पुण्य-प्राताप, सुख–शान्ति, सुकून से जोड़ा गया है I इन्हें पंचतीरथ की संज्ञा दी गई है I
मणिकर्णिका से जुड़े मिथक और किवदंतियां तमाम हैं I जीवन के अटल सत्य का साक्षी है यह घाट I तरह –तरह से इस सत्य को परिभाषित और व्याख्यायित किया गया है I गंगा के चौरासी घाटों की शृंखला में मनिकर्णिका का आभा मंडल अलग ही है I बनारस के घाटों के बारे में सोचते हुए मेरे जेहन में सबसे पहले अस्सी का नक्श उभरता है I वजहें कई हैं I लेकिन जो सबसे ख़ास है वह है काशीनाथ जी का दस्तावेज़ ‘काशी का अस्सी’I इस रचना ने अस्सी घाट को क्लासिक का दर्ज़ा दे दिया है I मणिकर्णिका अगर जीवन के अटल सत्य से रूबरू करवाता है तो अस्सी उस जिजीविषा से जो बनारस की रगों में बहती है I हालांकि इन दोनो बातों को परम्परा से जोड़ कर परम्परागत संदर्भ में समझने की आवश्यता है I दुनिया बदल रही है तो बनारस में भी बदलाव है , वह अछूता नहीं रह सकता I पीढ़ियों के चश्में इन बदलावों को अलग-अलग नज़रिए से देखते हैं जो स्वाभाविक ही है I बहरहाल वर्तमान का यथार्थ जो भी हो इतिहास में बनारस हमेशा ख़ास रहेगा I विश्व के प्राचीनतम जीवित शहर का दर्ज़ा इसे न सिर्फ़ एक अलग पहचान देता है बल्कि इसे एक नायाब मुकाम तक ले जाता है I उस मुकाम पर पहुंचना और उस पर बने रहने का उत्तरदाइत्व शहर बनारस का है I
#नज़रभबनारस
#Banaras
तस्वीर:योगेश अग्रवाल
________________नीलिमा

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