बनारस16

खाइ के पान बनारस वाला : 01 एक बनारसी की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु प्रकट होते हैं और वरदान स्वरूप उसको अमृत की भेंट देते हैं। प्रभु का अनुमान था कि बनारसी प्रसन्नता पूर्वक फौरन अमृत का रसपान करेगा। लेकिन यहाँ तो मामला उल्टा है। बनारसी के चेहरे पर दुविधा भरी हिचकिचाहट है। प्रभु उससे पूछते हैं- भगवान - "क्यों वत्स..अमृत क्यों नहीं पी रहे?" बनारसी - "अभहियें पान खाये हैं प्रभु।।"

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