बनारस08

शहर बनारस के तीर्थ-निर्माण की कथा मत्स्य पुराण के १८५ वें अध्याय में दर्ज़ है I कथा में कहा गया है व्यास मुनि बनारस के रहने वाले थे और भिक्षाटन कर अपना पेट पालते थे I एक बार कुछ ऐसा हुआ की उन्हें लगातार 06 महीनों तक भूखा रहना पड़ा I शहर में बसने वाला कोई भी गृहस्थ ब्राह्मणों को भिक्षा देने को तैयार न था I ये देख व्यास मुनि हैरान-परेशान, आखिर माजरा क्या है I एक तरफ भूख ने उन्हें व्याकुल कर रखा था I दूसरी तरफ़ सच्चाई जानने की अकुलाहट I काफी छानबीन किये लेकिन उन्हें गृहस्थों की बेरुखी की कोई ठोस वजह न मिल सकी I अब मुनि तो ठहरे मुनि , गुस्सा नाक पर I दूसरे भूख से त्रस्त I कुपित होकर उन्होनें नगर और नगर वासियों कों नष्ट होने का श्राप दे दिया I इस विपदा से बनारस को तारा शिव(महेश्वर) जी ने I उन्होंने शहर बनारस को तीरथ घोषित कर दिया जिससे वहां सतत दान-पुण्य चलता रहे और ब्राह्मणों की झोली भरी रहे I उन्हें कभी फाकाकशी की नौबत न आये I कथा से इतर एतिहासिक तौर पुरातात्विक तथ्य ये बताते हैं की आरंभिक मध्य काल के दौरान कई नगर अवसानोंन्न्मुख हो गये थे जिसकी वजह से पुराणकारों ने कई नगरों को तीर्थ घोषित किया Iमत्स्य पूरण का १८५ वाँ अध्याय ७००-१०००ईस्वी के बीच लिखा माना जाता है I उस समय उत्तर भारत के तमाम शहर व्यापार और वाणिज्य में आने वाली गिरावट की वजह से उजड़ रहे थे। तस्वीर:आशुतोष गोंड _______________नीलिमा ©neelima

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