भीमबेटका 07
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भारत में मध्य पाषाण काल का समय 10,000 ईसा पूर्व रखा गया है।भीमबेटका से चित्रकला के जो प्राचीनतम नमूने हमें मिले हैं वह मानव के उद्विकास के इसी कालखण्ड से संबंधित हैं।इससे पहले के,पुरापाषाण कालीन, नमूने हमें भीमबेटका से नहीं मिलते हैं।
मध्यपाषाण काल का मानव अपने जीवन निर्वाह के लिए शिकारी- संग्रहकर्ता अर्थव्यवस्था (hunting-gathering subsistence) पर निर्भर था।उसने तीर-धनुष का निर्माण कर लिया था। बड़े-बड़े जानवरों को झांसा देकर मारने के बजाय छोटे जानवरों का शिकार करने लगा था। शिकार की प्रक्रिया में आये इस परिवर्तन को 'स्माल गेम हंटिंग'(small game hunting) कहा गया है। मध्य पाषाण काल (mesolithic) में उसके औजार भी पहले की तुलना में काफ़ी छोटे हो गए और उपकरण निर्माण की परंपरा में लघु पाषाण उपकरण (microliths) के नाम से जाने गए।
भीमबेटका के मध्य पाषाणकालीन चित्रांकन हमें मानव के जीवन निर्वाह के तौर तरीकों को समझने में मदद करते हैं। इनके माध्यम से मानव के कर्मकांडीय पक्ष (beliefs & rituals) को विश्लेषित करने का प्रयास भी किया गया है।
तस्वीर: नीलिमा
#भीमबेटका
(रेखांकन यशोधर मठपाल)
©नीलिमा
(रेखांकन यशोधर मठपाल)
©नीलिमा




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