बनारस06

परम्पराएं : अनूठा बनारस बनारस जिसे हम धर्म की नगरी (Spiritual Capital of India) कहते हैं वहां सदियों से मणिकर्णिका घाट पर नगर वधुओं (वेश्याओं)का नृत्य उत्सव होता आया है। बहुत से लोग भारत की इस प्राचीन परंपरा से अनभिज्ञ हैं लेकिन ये सच है कि सदियों से बनारस के महाश्मशान घाट पर चैत्र माह में आने वाले नवरात्रों की सप्तमी की रात पैरों में घुंघरू बांधी हुई वेश्याओं का जमावड़ा लगता है। एक तरफ जलती चिता के शोले आसमान में उड़ते हैं तो दूसरी ओर घुंघरू और तबले की आवाज पर नाचती वेश्याएं दिखाई देती हैं।कहा जाता है कि पंद्रहवीं शताब्दी में अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने काशी के आराध्य देव भगवान शिव के मंदिर की मरम्मत करवाई। इस शुभ अवसर पर राजा मानसिंह बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन करना चाहते थे लेकिन कोई भी कलाकार यहां आने के लिए तैयार नहीं हुआ। शमशान घाट पर होने वाले इस महोत्सव में थिरकने के लिए नगर वधुएं तैयार हो गईं। इस दिन के बाद धीरे-धीरे कर यह परंपरा सी बन गई और तब से लेकर अब तक चैत्र के सातवें नवरात्रि की रात हर साल यहां श्मशान महोत्सव मनाया जाता है।धधकती चिताओं के बीच नृत्य करने के पीछे नगरवधुओं का तर्क होता है कि उन्हें अगले जन्म में इस दुर्गति से मुक्ति मिलेगी। इसी विश्वास से वह प्रत्येक वर्ष यहां आती हैं और अपना नृत्य पेश करती हैं।अब तक इस प्राचीन परंपरा के तहत केवल नगर वधुओं का नृत्य ही होता रहा है । एक अन्य संदर्भ में कहा गया है कि जब दशाश्वमेध घाट पर राजा जयसिंह मान महल का निर्माण करा रहे थे तो उसी समय राजा द्वारा महाश्मशान जी के मंदिर का भी कराया गया था चूकिं हिन्दू परम्परा में में है कि हर शुभ कार्य में संगीत जरूर होता है तो उस समय राजा को सामाजिक भेदभाव की वजह से ऐसा कोई संगीतकार नहीं मिला जो महामशान पर संगीत प्रस्तुत कर सके। तब काशी की नगर वधुओं को इस बात की जानकारी हुई कि उनके ईश्वर के सामने कोई संगीतकार नहीं आना चाहता है तो उन्हें काफी दुःख पहुचा। संदेश वाहक से नगर वधुओं ने यह संदेश राजा जयसिंह को भिजवाया कि अगर आप को ऐतराज ना हो तो अपने आराध्य को हम काशी की गणिकाएं नृत्याजलीं व गीतांजलि के जरिये दरबार सजाना चाहते हैं जिसे राजा ने स्वीकार करते हुए निमंत्रण भिजवा दिया कि काशी की गणिकाएं ही सजाएंगी बाबा महाश्मशान नाथ का दरबार और एक नई परम्परा का इस तरह श्री गणेश हुआ। ( इस परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ यदि किसी के पास हों तो साझा करें) _____________नीलिमा © neelima

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