भीमबेटका 03
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भीमबेटका के नाम पर सोचते हुए हम एक शैलाश्रय(rock shelter) से दूसरे शैलाश्रय के बीच भटक रहे थे। पास में ही आदमगढ़(Adamgarh) शैलाश्रय है। यहाँ से भी आदि मानव की उपस्थिति के साक्ष्य मिले हैं।'गढ़' माने किला या कोई ऐसी जगह जहाँ तक पहुँचना दुरूह हो । ये इलाका ही पहाड़ी-पठारी है, पूरा का पूरा। आदम वही अपने 'बाबा आदम के जमाने वाले'। आदिमानव(early man) के रिहायशी इलाके को इससे बेहतर नाम और क्या दे सकते हैं। इस नाम से भीमबेटका के नामकरण की दलील भी सरपट भले ही ना भागे पर कदम दो कदम तो चलती ही है।
गुफा चित्र कला को देखते हुए हम यह सोचते हैं कि, 'क्या हमारे पूर्वज हमसे कुछ कहना चाहते थे?' यह भी संभव है कि हम उनके खयालों में दूर-दूर तक कहीं थे ही नहीं। यह उनका आपस का संवाद हो या फिर ईश्वर के साथ की गई उनकी कोई वार्ता हो, आह्वान हो। बात को किसी भी रुख में बैठाइए गुफा चित्र कला है तो मानवता का पहला दस्तावेज ही। इस बात से गुरेज रखना और सहमत ना होना थोड़ा मुश्किल है। इस नज़रिये से प्रारंभिक मानव के विचार की प्रक्रिया को समझने का एक बेहद महत्वपूर्ण माध्यम है गुफा चित्रकला। लेकिन इनको डिकोड करना इतना आसान भी नहीं है। यह एक बेहद मुश्किल काम है और ढेर सारा अध्ययन तथा तकनीकी दक्षता मांगता है।
इतिहास में लिखते-पढ़ते समय हम शुरुआत प्राचीनतम से करते हैं। गुफा चित्र कला के अध्ययन पर भी यही बात लागू है। समय और स्थान इतिहास की पहली दो शर्तें हैं। फिर संदर्भ का नंबर आता है जिसके तहत अध्ययन किया जाता है। गुफाओं और शैलाश्रयों के चित्र सहज ही यह उत्सुकता जागते हैं कि आदि मानव ने पहली बार कब चित्रकारी की होगी? दूसरे उसकी उपस्थिति को पहचानने का हमारे पास माध्यम क्या है? कैसे तय करें कि वह पहली बार यहाँ कब आया?
जानवर और इंसान दोनों ही जंतु-जगत (एनिमल किंग्डम) का हिस्सा हैं। दोनों में फर्क औजार बनाने की क्षमता का है। औजार वह है जो रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना दे जिससे रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हो। जानवर कभी औजार नहीं बनाता है। यह उसकी बौद्धिक क्षमता के बाहर की बात है। लेकिन इंसान शुरुआत से ही औजार बनाता चला आ रहा है। पत्थर से लोहे के बीच के सफर में उसने जो मक़ाम हासिल किया है वह किसी से छिपा नहीं है। रही बात जानवरों की तो कभी किसी कुत्ते ने अगर आप को दौड़ाया हो तो या आप की ओर भौंका हो तो आप फ़ौरन ढेला, डंडा कुछ ना कुछ चला ही देते हैं। पर कुत्ते को अगर आप छेड़ते हैं तो वह ऐसा कुछ नहीं करता। उसकी जागीर सिर्फ उसका शरीर ही है।
वह आपको पंजा मार सकता है, आप पर भौंक सकता है, दांत गड़ा सकता है लेकिन ढेला कभी नहीं चलाएगा।औजार का इस्तेमाल उसके बस की बात नहीं। बंदर जरूर नकल में आपकी हरकतों को दोहरा देता है पर 'नकल में अक्ल' वाला मुहावरा आज भी मजबूत है।
औजार इंसान के सबसे पुराने साथी हैं। आशुलियन औजारों से माइक्रोलिथ तक का जो सिलसिला भीमबेटका में मौजूद है वह इस जगह को बेहद खास बनाता है। औजारों का होना आदि मानव की उपस्थिति का प्रामाणिक साक्ष्य है। पहले उसने औजार बनाए। चित्रकारी काफी बाद में की। भीमबेटका से जो सबसे पुराने औजार मिले हैं वह 100,000 से 40,000 वर्ष पुराने हैं। इस समय आदमी चित्र नहीं बनाता था। चित्र उसने उच्च पुरापाषाण काल (30,000 वर्ष)से बनाने शुरू किए। सबसे पुराने चित्र हमें फ्रांस से मिले हैं। भीमबेटका के चित्र कुछ और बाद में बने। इनका समय मध्य पाषाण काल (10,000 वर्ष) और उसके बाद का है।
तस्वीर: नीलिमा
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©नीलिमा
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