भीमबेटका 02

🔹02 बचपन में गुफा शब्द सुनते ही हम भय,रहस्य और रोमांच के मिले-जुले भावों से घिर जाते थे। अचरज और कौतूहल थोड़ा ठहर कर आते थे। गुफाओं के किस्से सुनने-सुनाने में ही बचपन बीत गया। देखने का मौका कभी हाथ न लगा। लिखने-पढ़ने के पायदान चढ़ते हुए एम. ए. की कक्षाओं में गुफा मानव पर ठीक-ठाक तफसिरा हुआ। बहस-मुबाहिसे हुए। नतीजा ये कि वह शोध का विषय बन गया। लिखने-पढ़ने की उस दुनिया में गुफा- चित्रकला की वीथियों से गुजरते हुए भीमबेटका से पहला परिचय हुआ। लिखत-पढ़त में नाम भीमबेटका ही मिलता है । कुछ शुद्धतावादी जरूर इसे भीमबैठका पढ़ते हैं । भीमबेटका का नाम सुनते ही गदाधारी भीम की याद ताजा हो जाती है। ये यादें महाभारत के किस्सों को सुनकर बनी हैं। इनकी बिनाह पर हम भीम के रंग-रूप और सुगंध की कल्पना करते हैं। देखा तो किसने ही होगा उन्हें, मिथक हैं या इतिहास विवाद के घेरे में है। उस पर हम फिर कभी बात करेंगे । यहाँ मसला सिर्फ इतना ही कि महाभारत और रामायण हमारे जीवन में इतने रच-बस गए हैं कि उनसे जुड़े किस्से-कहानी, मिथक और किरदार हमें गहराई से बांध लेते हैं। यही वजह रही होगी कि हमने भीमबेटका को चुना होगा। दरअसल जिस जगह भीमबेटका स्थित है, गुफाएं और शैलाश्रय तो वहाँ बहुत से हैं पर भीमबेटका को चुनने के पीछे रामायण और महाभारत का हमारे जीवन में रचा- बसा होना है। सुनते ही भीमबेटका नाम हमें जंच गया और इसी पर लिखना-पढ़ना तय हुआ। खैर! ये बीते दिनों की बात है। फ़िलहाल हम भीमबेटका के नाम पर विचार कर रहे हैं। भीमबेटका के आसपास के लोग इसे 'भीम की बैठक' के रूप में पहचानते हैं। इन लोगों का यह मानना है कि यहाँ पर कभी भीम की बैठक थी। नाम में साम्य की वजह से इस शैलाश्रय को ये लोग महाभारत से जोड़ कर देखते हैं। 'बैठक' को अगर रुकने,ठहरने या विश्राम करने की जगह मान लिया जाए तो बात कुछ जमती है। अब बचा 'भीम' तो आदि मानव के विकास के विभिन्न चरणों में होमोसेपियंस सेपियन्स ही सबसे अधिक सींकिया है। बाकी सारे मानव हठ्ठे-कट्टे भीमकाय पहलवान सरीखे थे। सम्भव है कि आदि मानव का अभ्यारण्य होने की वजह ने भीमबेटका नाम को जन्म दिया। अगर कोई और वजह है इस नाम के पीछे तो वह ढूंढनी होगी । फिलहाल की पूछताछ में तो कोई ख़ास जानकारी मिली नहीं। #भीमबेटका
तस्वीर: नीलिमा
©नीलिमा

Comments

Popular posts from this blog

तीजनबाई और पण्डवानी

🖤 छूटी आदम से जन्नत : लखनऊ रिविजिटेड - 01

विश्व की प्राचीन सभ्यताएं: नीलिमा पाण्डेय