बनारस02

काशी, बनारस शहर के पुराने नामों में से है I मिथकों में काशी को शिव के त्रिशूल पर बसा बताया गया है I परम्परा में शिव और काशी को एकरूप माना गया है I कहते हैं की एक दफ़ा शिव और ब्रह्मा में युद्ध हुआ I लड़ाई के दौरान शिव ने ब्रह्मा के पाँच सिरों में से एक को चीर दिया I ब्रह्मा को अपमानित करने के लिए चीरे हुए सर के मुंह में एक लगाम लगा दी I शिव इसे अपने साथ टांगे घुमते थे ,जीत की प्रशस्ति की तरह I एक बार वह घुमते-टहलते हुए काशी आए I काशी की धरती पर पैर पड़ते ही ब्रह्मा का सर उनके हाथ से छूट कर धरती में समा गया I ऐसा वाराणसी की धरती की पवित्रता की वजह से हुआ I प्राचीन काल में वरुणा और असी दो नदियों से घिरा भ-भाग काशी राज्य के नाम से जाना जाता था जिसकी राजधानी वाराणसी थी I उत्तर वैदिक साहित्य में इसका उल्लेख है I बौद्ध जातकों में बनारस को आर्थिक रूप से समृद्ध नगरी के रूप में प्रदर्शित किया गया है जहां व्यापार और वाणिज्य से जुडी गतिविधियों की वजह से हमेशा रौनक और आवाजाही रहती थी I काशी और कोसल परम्परागत दुश्मन थे I बीच-बीच में अंग (भागलपुर) और मगध (दक्षिणी बिहार ) के साथ भी तलवारें भांज ली जाती थीं I लड़ते-झगड़ते एक दिन काशी कोसल का हिस्सा हुआ और अंग मगध का I राजघाट (बनारस) में की गई खुदाई से पता चलता है कि सबसे पुराना वास वहां लगभग ५०० ईसा पूर्व* का था भविष्य के पुरातात्विक शोध इस तिथि में संशोधन कर सकते हैं। नगर के चारो ओर मिट्टी के बाँध का घेरा था I जान पड़ता है कि आरम्भ में काशी सबसे शक्तिशाली था किन्तु बाद में उसने कोसल (पूर्वी उत्तरप्रदेश) की शक्ति के सामने आत्मसमर्पण कर दिया I * भविष्य के पुरातात्विक शोध अधिवास( habitation) की इस तिथि में संशोधन कर सकते हैं।अब राजघाट की प्राचीनता 1200 ईसा पूर्व तक आंकी जा रही है, यह कल और पीछे भी जा सकता है। _____________नीलिमा © neelima




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