धर्म, महामारी और चित्रकला :03

‘मृत्यु की विजय’ शीर्षक का यह चित्र, दक्षिण इटली के पालेर्मो शहर के रीजनल गैलेरी में है । पहले यह भित्तिचित्र पालेर्मो के ही राजमहल की दीवार पर बना हुआ था जिसे बीसवीं सदी में, चार खण्डों में विभाजित कर, संग्रहालय( रीजनल गैलरी ) की दीवार पर चिपकाया गया है। 1446 में बने इस फ्रेस्को का एक और ख़ास महत्व भी है। पन्द्रहवीं सदी तक इटली में बने चित्रों में मृत्यु को भयावह और विचलित कर देनेवाले रूपकों के जरिये चित्रित करने का चलन नहीं था। पर इस भित्तिचित्र में हम न केवल मृत्यु को, तीर चलाते हुए डरावने शक्ल के घोड़े पर सवार एक नरकंकाल के रूप में ही पाते हैं , चित्र के निचले हिस्से में तीर बिंधे मृत लोगों के चेहरों में मृत्यु के पूर्व, दर्द के गहरे निशान मौजूद दिखते हैं । इस चित्र में एक ओर जहाँ मौत से डरे लोगों का दल ,अपनी जिंदगी की भीख मांग रहा है वहीं दाहिनी कुछ लोग और हैं,जो महामारी से अप्रभावित दिख रहे है।

 @अशोक भौमिक

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