हिन्दू देवी: लक्ष्मी 01

लक्ष्मी: 01

 देवी लक्ष्मी के लिए एक अन्य संज्ञा श्री भी मिलती है।कभी कभी इन्हें एक साथ जोड़ कर भी उच्चरित किया जाता है। इतिहासकार प्रायः ये मानते हैं कि ये दो भिन्न देवियां थीं। देवी के रूप में श्री की स्तुति श्री सूक्त में मिलती है।ये सूक्त ऋग्वेद में मिलता है। इसमें श्री और लक्ष्मी के नाम से देवी की वंदना की गई है। श्री सूक्त में भले ही इन्हें एकरूप प्रदर्षित किया गया हो अन्य स्रोतों में इनका पृथक व्यक्तित्व दर्शाया गया है। तैतरीय अरण्यक, वाजसनेयी संहिता, रामायण का इस सन्दर्भ में उल्लेख किया जा सकता है। रामायण के अरण्य कांड में रावण सीता पर मुग्ध होकर पूछता है: "कि क्या वे श्री,कीर्ति या लक्ष्मी हैं।या कोई अप्सरा हैं।" भरत नाट्यशास्त्र उनका उल्लेख दिव्य मातृकाओं के रूप में करता है। हालांकि ऐसे संदर्भ कम ही हैं। ज्यादातर इन्हें एक ही देवी का नाम स्वीकार किया गया है। महाभारत के शांतिपर्व में दोनों को को एकरूप दर्शाया गया है। आर्यों के आगमन से पूर्व श्री लक्ष्मी उर्वरता की देवी थी। कालांतर में इसमें आर्यों और अनार्यों की देवियों से सम्बद्ध अनेक धारणाओं को आत्मसात कर एक नया रूप दिया गया। इस क्रम में एक मातृ देवी विभिन्न परिवर्तनों से गुजर कर गुप्तकाल में वैष्णव देवता विष्णु से सम्बद्ध हुई। तंत्र मंत्र के उत्थान के साथ उसे विष्णु की शक्ति मान लिया गया।

 तस्वीर : नवीं शताब्दी ईसवी की है। ( LACMA collection,USA)

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