साम्प्रदायिक वैमनस्य : 03

साम्प्रदयिक वैमनस्य:03 वैष्णव और शैव सम्प्रदाय के बीच भी वैमनस्यता के संदर्भ मिलते हैं। वैष्णव इस मामले में कुछ अलग हैं। उन्होंने कभी उत्पीड़न का रास्ता नहीं चुना। बजाय उत्पीड़न के उन्होंने दूसरों को आत्मसात करने पर बल दिया। इस काम के लिए उन्होंने अवतारों की कल्पना का बड़ा सदुपयोग किया। किन्तु वैष्णव भी श्रमणों को आत्मसात करने के इच्छुक न थे। वे जनजातियों और लोक उपासना पद्धतियों और रामायण-महाभारत के कथानकों को आत्मसात करना अधिक पसंद करते थे।यद्यपि विष्णु के दस अवतारों में बुद्ध की गिनती तो कर ली गयी किंतु बुद्ध के जीवन से संबंधित ऐसे मिथकों की सृष्टि पुराणों में नहीं मिलती जैसी अन्य अवतारों के संबंध में मिलती है।
 ______________नीलिमा

तस्वीर:देवगढ़ का दशावतार मन्दिर

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