साम्प्रदायिक वैमनस्य :02
सम्प्रदायिक वैमनस्य :02
सम्प्रदायिक वैमनस्य का उदाहरण दक्षिण भारत में तमिलनाडु से भी मिलता है।तमिलनाडु में सातवीं सदी में शैवों ने जैन ठिकानों पर हमले शुरू किए और अंततः उन्हें निकाल बाहर किया।पड़ोस में कर्नाटक में इसके कुछ बाद वैष्णवों या लिंगायतों ने विदेशी व्यापार से समृद्धि और हैसियत प्राप्त कर जैन मुनियों का उत्पीड़न प्रारंभ कर दिया और जैन मूर्तियाँ तोड़ डाली। कुछ अभिलेखों में वीर शैवों ने फसाद के लिए जैनों को उत्तरदायी ठहराया है। इस शत्रुता के मूल में आर्थिक कारण थे। पहले विदेशी व्यापार पर जैनों का नियंत्रण था।बाद में वीर शैव भी उसमें शामिल हो गए। दूसरे जैनों का विद्वता के क्षेत्र में ऊँचा स्थान था। इसलिए भी राजदरबारों में मंत्रियों और प्रशासन में उच्च पदों के लिए वीर शैव उन्हें अपना प्रतिद्वन्दी मानते थे। __________________नीलिमा
तस्वीर: लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
सम्प्रदायिक वैमनस्य का उदाहरण दक्षिण भारत में तमिलनाडु से भी मिलता है।तमिलनाडु में सातवीं सदी में शैवों ने जैन ठिकानों पर हमले शुरू किए और अंततः उन्हें निकाल बाहर किया।पड़ोस में कर्नाटक में इसके कुछ बाद वैष्णवों या लिंगायतों ने विदेशी व्यापार से समृद्धि और हैसियत प्राप्त कर जैन मुनियों का उत्पीड़न प्रारंभ कर दिया और जैन मूर्तियाँ तोड़ डाली। कुछ अभिलेखों में वीर शैवों ने फसाद के लिए जैनों को उत्तरदायी ठहराया है। इस शत्रुता के मूल में आर्थिक कारण थे। पहले विदेशी व्यापार पर जैनों का नियंत्रण था।बाद में वीर शैव भी उसमें शामिल हो गए। दूसरे जैनों का विद्वता के क्षेत्र में ऊँचा स्थान था। इसलिए भी राजदरबारों में मंत्रियों और प्रशासन में उच्च पदों के लिए वीर शैव उन्हें अपना प्रतिद्वन्दी मानते थे। __________________नीलिमा
तस्वीर: लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

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