लखनऊ मेल :02

आस्था का तार्किकता के साथ हमेशा से ही 36 का आकड़ा रहा है।पिछले कुछ दिनों में इस बारे में हमारी राय और पुख़्ता हुई है। निराली आस्था का एक ऐतिहासिक उदाहरण हमारे शहर से भी मिलता है। नज़ाकत, नफ़ासत, अदावत, इबादत के नवाबी अंदाज़ के लिए मशहूर है हमारा शहर लखनऊ। इबादत का एक निराला अंदाज़ कैप्टन वेल्स की मजार से देखने को मिलता है। यह मज़ार बरी-कलां गाँव के एक खेत में स्थित है। बेगम हज़रत महल और उनके साथियों के साथ होने वाले संघर्ष में 19मार्च,1858 को कैप्टन वेल इसी जगह बुरी तरह से घायल हुए । 21 मार्च,1858 को उनकी मृत्यु हो गई। साथी एल. बी. जोंस ने यहीं वेल्स को दफ़न करवा दिया। आस-पास के लोग कैप्टन वेल को कप्तान शाह बाबा, गोरे बाबा,सिगरेट वाले बाबा के नाम से पुकारते है और उनकी मज़ार पर शराब,मांस और सिगरेट का चढ़ावा चढ़ाते हैं। वेल्स की कब्र मज़ार में जब तब्दील हुई इसकी कोई पुख़्ता ऐतिहासिक जानकारी नहीं मिलती। न ही ये पता चलता है कि एक फिरंगी के प्रति आसपास के लोगों की आस्था का सबब क्या है? बहरहाल मांस-मदिरा का चढ़ावा तो देखा-सुना है पर सिगरेट को धूप-अगरबत्ती की तरह आस्था से सुलगाना नायाब है। इतिहास की इन विलुप्त कड़ियों की तलाश जारी है...
__________नीलिमा

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