हिन्दू देवी: लक्ष्मी 02
लक्ष्मी:02
उर्वरता की देवी की परिकल्पना संस्कृतियो के प्रारंभिक चरण से मिलती है।ज्यादातर प्राचीन समाजों की यह सामान्य विशेषता है।यूनान की देवी दिमिट्रिस मिस्र की देवी आइसिस को उदाहरण स्वरूप गिनवाया जा सकता है। सामान्यतः ये माना जाता है कि शिकारी संग्रहकर्ता अर्थव्यवस्था में पुरूष के जिम्मे शिकार करना था और स्त्री संग्रह कर्ता की भूमिका में थी। स्त्रियां हड्डियों, लकड़ी , टहनी के टुकड़े आदि का इस्तेमाल कर जमीन खोद कर कंदमूल इत्यादि इकट्ठा करती थीं। इस प्रक्रिया से गुजरते हुए स्त्रियों ने अनुभव जन्य ज्ञान प्राप्त किया कौन से पौधे कहाँ और किस मौसम में मिल सकते हैं। ये जानकारी क्रमशः कृषि विषयक ज्ञान में तब्दील हुआ। इसी वजह से विल ड्यूरेन्ट और अन्य कई इतिहासकार आरंभिक अवस्था में कृषि की जानकारी का श्रेय स्त्रियों को देते हैं। फावड़े के इस्तेमाल से बागवानी की शुरुआत स्त्रियों ने की। बाद में जब हल का प्रचलन शुरू हुआ तो खेती का काम पुरुषों का हो गया। आयुधों के साथ भी इस तथ्य को जोड़ कर देखा जा सकता है। भले ही स्त्री/देवी को उर्वरा शक्ति का अथवा कृषि की देवी का प्रतीक माना गया है। हल का आयुध उसके साथ कभी नहीं जुड़ा। हल संकर्षण के हिस्से आया। हलधर बलराम कहलाये। बलराम संकर्षण का ही एक अन्य नाम है।
तस्वीर: लक्ष्मी 12वीं-13वीं शताब्दी ( Matsuoka Museum of Art, Tokyo)
उर्वरता की देवी की परिकल्पना संस्कृतियो के प्रारंभिक चरण से मिलती है।ज्यादातर प्राचीन समाजों की यह सामान्य विशेषता है।यूनान की देवी दिमिट्रिस मिस्र की देवी आइसिस को उदाहरण स्वरूप गिनवाया जा सकता है। सामान्यतः ये माना जाता है कि शिकारी संग्रहकर्ता अर्थव्यवस्था में पुरूष के जिम्मे शिकार करना था और स्त्री संग्रह कर्ता की भूमिका में थी। स्त्रियां हड्डियों, लकड़ी , टहनी के टुकड़े आदि का इस्तेमाल कर जमीन खोद कर कंदमूल इत्यादि इकट्ठा करती थीं। इस प्रक्रिया से गुजरते हुए स्त्रियों ने अनुभव जन्य ज्ञान प्राप्त किया कौन से पौधे कहाँ और किस मौसम में मिल सकते हैं। ये जानकारी क्रमशः कृषि विषयक ज्ञान में तब्दील हुआ। इसी वजह से विल ड्यूरेन्ट और अन्य कई इतिहासकार आरंभिक अवस्था में कृषि की जानकारी का श्रेय स्त्रियों को देते हैं। फावड़े के इस्तेमाल से बागवानी की शुरुआत स्त्रियों ने की। बाद में जब हल का प्रचलन शुरू हुआ तो खेती का काम पुरुषों का हो गया। आयुधों के साथ भी इस तथ्य को जोड़ कर देखा जा सकता है। भले ही स्त्री/देवी को उर्वरा शक्ति का अथवा कृषि की देवी का प्रतीक माना गया है। हल का आयुध उसके साथ कभी नहीं जुड़ा। हल संकर्षण के हिस्से आया। हलधर बलराम कहलाये। बलराम संकर्षण का ही एक अन्य नाम है।
तस्वीर: लक्ष्मी 12वीं-13वीं शताब्दी ( Matsuoka Museum of Art, Tokyo)

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