परंपरा :01

परंपरा : 01

 हिंदुस्तान के अतीत से जुड़ी विभिन्न प्रकार की धारणाएं लगभग पिछले दो सौ बरसों से धीमी आँच पर खदक रही हैं। इनमे से कुछ तो लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार कर ली गई हैं और अब परम्परा का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं। अपनी अस्मिता की व्यख्या में डूबे समाज में ये प्रक्रिया निरन्तर जारी रहती है। सांस्कृतिक इतिहास/cultural history का अध्ययन करने वाले इतिहास कार इस अस्मिता को पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए ये जरूरी हो जाता है कुछ वक्त के बाद इतिहासकार ठहर कर निर्धारित की गई परंपराओं पर विचार करे। खासतौर पर इस बात का विश्लेषण जरूर करे कि अतीत के प्रारूप की दी गई उसकी व्याख्या सत्य के कितने करीब है।जिन बातों को परम्परा में रूपांतरित किया गया है क्या वे वास्तव में परम्परा का दर्जा पाने लायक हैं या नहीं। महाभारत की शकुंतला से कालिदास की शकुंतला में जो रूपांतरण हुआ उससे इस बात को बेहतर समझा जा सकता है।
 ______________नीलिमा
 तस्वीर: शकुंतला/राजा रवि वर्मा कृति

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