तीजनबाई और पण्डवानी
♦️तीजनबाई और पंडवानी: छत्तीसगढ़ की लोक कला की अमर आवाज भारतीय लोक संस्कृति की धरोहरों में पंडवानी एक अनुपम कला है। यह महाभारत की कथाओं को संगीत, गायन और नाटकीय अभिनय के माध्यम से जीवंत करने वाली छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला है। इस कला को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली महान कलाकार डॉ. तीजनबाई (8 अगस्त 1956 – 5 जुलाई 2026) का नाम सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। तीजनबाई न केवल पंडवानी को पुरुष-प्रधान क्षेत्र से निकालकर महिलाओं की पहुंच में लाईं, बल्कि इसे गांव की चौपाल से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। पद्म विभूषण प्राप्त उनकी यह यात्रा संघर्ष, समर्पण और सांस्कृतिक संरक्षण की मिसाल है। ♦️पंडवानी कला पंडवानी शब्द “पांडव + वाणी” से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पांडवों की कहानी। यह छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों (मध्य प्रदेश, ओडिशा आदि) में प्रचलित लोक कथा-गायन की एक विशिष्ट शैली है। इसमें महाभारत के प्रसंगों को मुख्य रूप से भीम को केंद्र में रखकर गाया और अभिनीत किया जाता है। ♦️मुख्य विशेषताएं ◆ एकल प्रस्तुति: मुख्य कलाकार अकेले ही गाता, बोलता और कई पात्रों का अभिनय क...

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