राम कथा और हम -06

जब राजनीतिक उद्देश्य से धर्म के नाम पर उसके अनुयायियों को उभारा जाता है तब साम्प्रदायिकता का उदय होता है। अपने सम्प्रदाय की सुरक्षा के नाम पर दूसरे सम्प्रदाय के लोगों को सताना भी सम्प्रदायिकता है।

 हमारे देश में सम्प्रदायिकता को सिर्फ़ हिन्दू-मुसलमान की परिधि में देखा जाता जो ऐतिहासिक रूप से गलत है।शैव-वैष्णव,बौद्ध-ब्राह्मण के आपसी हिंसक टकराव के अनेक उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। आरम्भिक मध्य कालीन बिहार की विभिन्न प्रतिमायें स्पष्ट रूप से यह संकेत करती हैं कि बौद्धों और ब्राह्मण धर्म के अनुयायियों के बीच संघर्ष रहा। इन प्रतिमाओं में अपराजित सहित कई बौद्ध देवताओं को शैव देवों को पैर से रौंदते हुए चित्रित किया गया है। धर्मग्रन्थों में यह टकराव बौद्धों के खिलाफ शंकर द्वारा व्यापक पैमाने पर चलाये गए अभियान में प्रतिविम्बित होता है।

ये सोचना गलत होगा कि बौद्धों का इस देश से सफाया केवल इस वजह से हुआ कि उनके खिलाफ वैचारिक प्रचार किया गया था। उत्पीड़न ने भी इसमें निश्चित रूप से भूमिका निभाई। भागकर दूसरे देश में पनाह लेना उनके सामने उपलब्ध पहला विकल्प था। दूसरे वे सामाजिक विषमताओं से छुटकारा पाने के लिए इस्लाम भी अपना सकते थे। इस बात पर ध्यान इसलिए जाता है क्योंकि भारत में धर्म के रूप में इस्लाम वही दृढ़ता से पैर जमा सका जो बौद्ध धर्म के गढ़ थे। यह बात कश्मीर, उत्तर-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र,पंजाब और सिंध के बारे में कही जा सकती है। नालंदा(बिहार शरीफ़),भागलपुर (चंपानगर),बांग्लादेश जहाँ बौद्ध अधिक संख्या में थे आज मुस्लिम आबादी है।

बौद्धों के अलावा जैनियों का भी उत्पीड़न किया गया। मूर्ति कला से इसके प्रमाण उपलब्ध हैं। कुछ विरुपित मूर्तियां लखनऊ संग्रहालय में देखी जा सकती हैं। जैनियों ने अपने रीति-रिवाजों  की संशोधित कर ओर प्रभुत्व शाली ब्राह्मणवादी जीवन शैली अपना ली।

हिन्दू धार्मिक नेताओं के बीच साम्प्रदायिक असहिष्णुता का स्पष्ट उदाहरण अयोध्या के मध्यकालीन इतिहास में उपलब्ध है। जब तक औरंगजेब के शासन रहा अयोध्या में शान्ति रही। उसकी मृत्यु के बाद 1707 के पश्चात हम वहाँ शैव सन्यासियों और वैष्णव वैरागियों के संगठित दलों के बीच खुला टकराव देखते हैं। विवाद का मुद्दा धार्मिक स्थलों पर कब्जा और चढ़ावे से होने वाली आय हथियाना था।(हैस्बेकर, अयोध्या, गोर्निंगन,1986,पृ.149) कुल मिलाकर हिन्दू सम्प्रदायों के बीच सहिष्णुता  दूर की कौड़ी लगती है।
________________नीलिमा

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