राम कथा और हम-04

वाल्मीकि रामायण प्राचीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। हिन्दी भाषी क्षेत्र में रामकथा को लोकप्रिय बनाने का श्रेय रामचरितमानस को जाता है जो वाल्मीकि रामायण पर ही आधारित है। शुरुआत में वाल्मीकि की रामायण में 6000 श्लोक थे जो क्रमशः बढ़कर 12000 और अंततः 24000 हो गए। विषय वस्तु के आधार पर जब हम इस ग्रन्थ का विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि इसमें विकास के चार स्तर निहित हैं।इसकी शुरुआत 400 ईसा पूर्व की संभावित है और अंतिम अवस्था 1200 ईसवी की मानी जाती है।कुल मिलाकर सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास के कई चरण रामायण में समाहित हैं।

महाकाव्य का महत्व इस बात में है कि यह वर्ग विभाजित,पितृसत्तात्मक, राज्य सत्ता और आधारित समाज मे व्यवस्थित कार्य संचालन के लिए न सिर्फ़ कई आदर्श निर्धारित करता है बल्कि उन्हें पोसता भी है। रामायण में इस बजट पर बल दिया गया है कि विभिन्न वर्गों और जातियों को  अपने लिए निर्दिष्ट कार्यों को  सम्पन्न करना चाहिए। यदि कोई ऐसा नहीं करता है और अपनी जाति के लिए निर्धारित कार्यों से भटकता है तो उसे निर्ममता से कठोर दंड देने चाहिए।
राजा के लिए भी रामायण में निर्देश है कि वह धर्म के बनाये आदर्शों पर चले। इस प्रकार वह वर्ण और परिवार की रक्षा कर सकेगा।

परिवार के लिए निर्देश है कि पुत्र को पिता की,छोटे भाई को बड़े भाई की और पत्नी को पति की आज्ञा का पालन करना चाहिये। इनकी बानगी हम राम,भरत,लक्ष्मण और सीता में देखते हैं।
_________________नीलिमा

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