प्रतिरोध के स्वर

#प्रतिरोध के स्वर -05
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 कुंती और द्रौपदी आर्य समाज की स्त्रियां हैं।इनका प्रारंभिक परिचय हमें आदि पर्व में मिल जाता है। यद्यपि ये दोनों स्त्रियां आदि पर्व तक सीमित नहीं हैं बल्कि महाभारत के पूरे कथानक में रची  बसी हैं। वास्तव में ये दोनों स्त्री चरित्र काफी उलझे हुए हैं।स्वाग्रही होते हुए भी ये प्रायः पितृसत्ता के मानकों का पालन करते हुए धर्मशात्रीय निदर्श के अनुरूप ही व्यवहार करते दिखते हैं। पांडवों की माता के रूप में कुंती की राजनैतिक महत्वाकांक्षा प्रबल है। इन महत्वाकांक्षाओं को वह पितृसत्ता के दायरे में रह कर पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करती है।कुंती का कर्ण को सार्वजनिक रूप से स्वीकार न करना,पांडु को शारीरिक अक्षमता के बावजूद सहर्ष स्वीकार कर लेना,पति और संतति को लेकर माद्री से स्त्री-सुलभ प्रतिस्पर्धा, पांडु की मृत्यु का दोष  माद्री पर मढ़ना,कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद धृतराष्ट्र और गांधारी के साथ उनकी सेवा करने के उद्देश्य से वनगमन कुंती को पितृसत्तात्मक समाज की प्रशंसनीय स्त्री बनाते हैं। द्रौपदी को पांचों पुत्रों की पत्नी बनाना,कर्ण को पांडवो की तरफ से युद्ध करने के लिए भावनाओं में बांधकर प्रेरित करने की कोशिश, युधिष्ठिर को निरंतर युद्ध के लिए प्रेरित करना,द्रौपदी को उसका अपमान याद दिलाते रहना आदि उसके राजनैतिक रूप से महत्वाकांक्षी-कूटनीतिक स्त्री रूप से परिचित कराते हैं। कुछ स्थानों पर स्वाग्रही होने के बावजूद कुंती का चरित्र पितृसत्ता के मानकों से अधिक विचलन नहीं दिखाता।
द्रौपदी महाकाव्य की नायिका है।उसकी ओजस्विता आकर्षित करने वाली है।उसके चरित्र की बुनावट में अनेकों उत्तर-चढ़ाव दिखते हैं।उसके चरित्र की विशेषता ये है कि वह अपनी प्रताड़ना को भाग्य का लेखा नहीं मानती है।अपनी दुर्दशा के लिए वह अपने पतियों को जिम्मेदार ठहराती है।सार्वजनिक सभा में किए गए अपमान से उत्पन्न क्षोभ द्रौपदी को विवश कर देता है कि वह पांडवों को पौरुष विहीन कहे। इस ओजस्वी मुखर नायिका के चरित्र का एक दूसरा पक्ष भी है। पाँच पुरुषों के बीच बांटे जाने का विरोध न करना,वनपर्व में कर्तव्यपरायण गृहणी की भूमिका उसे  समर्पण,त्याग,विनयशीलता जैसे गुणों से सम्पन्न  पतिव्रता स्त्री   के रूप में दर्शाते हैं तो कभी वह एक अत्यंत क्रूर हृदयहीन स्त्री के रूप में हमारे सामने आती है जिसके अपमान का बदला भीम को  दुःशासन का हृदय चीर कर लेना पड़ता है। कभी कभी हम उसे मानिनी स्त्री के रूप में भी पाते हैं।
______________नीलिमा
(इतिहास में स्त्री-18)
#her_story

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