पवित्र गाय

गाय की पवित्रता-01
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परंपरागत रूप से धार्मिक हिंदू व्यक्ति यह मानता है की उसके पूर्वज वैदिक आर्य गाय को पवित्र मानते थे। वर्तमान समय में गाय को हिन्दुओं की सामुदायिक पहचान का प्रतीक मानते हुए ऐसा दर्शाया जा रहा है कि गाय और हिंदुओं की सांस्कृतिक परंपरा को मुसलमानों से खतरा है क्योकि वे गोमांस खाते हैं। इसी बात को केंद्र में रखते हुए गाय की पवित्रता का  शिद्दत से प्रचार किया जा रहा और इसकी प्राचीनता को वेदों में आरोपित किया जा रहा है। यह तथ्य ऐतिहासिक रूप से बिलकुल गलत है।दरअसल भारतीय समाज का एक वर्ग गाय को ऐसे समय(वैदिक काल)में पवित्र एवं पूज्यनीय बनाने पर तुला है जब उसकी बलि देने और मांस खाने का प्रचलन था।साहित्यिक एवं पुरातात्विक संदर्भो से ये संकेत मिलता है कि भोजन के लिए गोहत्या लगभग तेरहवीं शताब्दी तक की जाती रही। इसके बाद ही ब्राह्मणों के द्वारा गोमांस खाने का सख्ती से निषेध किया गया। ब्राह्मणवादी निषेधाज्ञा का परिणाम यह हुआ कि मध्यकाल में गाय पूज्यनीय हो गई और क्रमशः शासकों के हाथों का राजनीतिक हथियार बन गई।बाबर, अक़बर, जहांगीर और औरंगजेब जैसे मुग़ल शासकों ने गाय के प्रति जैनियों और ब्राह्मणों की भावना को ध्यान में रखते हुए गो हत्या पर आंशिक प्रतिबन्ध लगा दिया।
#debates _in_history

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