राम कथा और हम

#राम कथा और हम -04
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लोक संस्कृति के ऐसे आयाम जो जन की आस्था और भक्ति भावना से जुड़ जाते हैं उनके ऐतिहासिक विश्लेषण में आस्था के साथ टकराहट की स्थितियां पैदा हो जाती हैं,जिसकी वजह से ऐसे विषय संवेदनशील हो जाते हैं। राम और राम कथा की ऐतिहासिकता ऐसा ही विषय है। फिर भी इस विषय पर काफी कुछ लिखा पढ़ा गया है और जन के बीच इसकी गहरी पैठ के कारणों को जानने का प्रयास किया गया है। राम कथा की विशेषता ये है कि ये किसी एक वर्ग,समुदाय,धर्म या क्षेत्र तक सीमित नहीं है।इसका प्रसार व्यापक है।यह हिदुस्तान के आम जन की कथा है। यही सर्वव्यापकता इसको विशिष्ट बनाती है और भारतीय लोक का अभिन्न अंग भी।राम कथा के विकास के शुरुआती दौर में राम एक नायक हैं,वीर योद्धा हैं जो कथा क्रम के विकास का अंतिम चरण आते-आते देवता का रूप ले लेते हैं और विष्णु के अवतार के रूप में पूजे जाने लगते हैं। मूर्ति कला में उन्हें तीर-धनुष के साथ दिखाया जाता है। वे त्रेता युग के तीन अवतारों में से अंतिम हैं और महत्वपूर्ण भी।
राम कथा का प्रचलन हम ब्राह्मण, जैन और बौद्ध परंपराओं में पाते हैं।यद्धपि आदि कवि माने जाने वाले वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से राम-कथा के ढांचे को एक रूढ़ रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथापि  इस कथा के  पूर्ववर्ती और विभिन्न रूपों के चिह्न ब्राह्मणेतर अर्थात बौद्ध और जैन स्त्रोतों में देखे जा सकते हैं।
_________नीलिमा
#debates_in_history

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