प्रतिरोध के स्वर
अक्का महादेवी
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अक्का महादेवी 12वीं शताब्दी ईसवी के वीरशैव भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है।उसके नाम के साथ जुड़ा अक्का (बड़ी बहन)शब्द उसकी सम्मानजनक स्थिति का सांकेतिक सूचक है।अपने शुरुआती जीवन में अक्का महादेवी नें विवाह को प्राथमिकता देते हुए गृहस्थ जीवन चुना।किन्तु साथी के साथ असंगतता एवं अपमानजनक परिस्थितियों से वशीभूत उसने संबंध विच्छेद कर लिया।खुद को दिलासा देने के लिए उसने अध्यात्म की शरण ली।उसकी कविताओं का कौटुम्बिक भाव दर्शाता है कि कैसे वह अपने पारिवारिक जीवन की क्षतिपूर्ति करने के लिए प्रयासरत है।उसके भावोद्गार का सुंदर चित्रण एक वाचन में मिलता है जहां शिव पति हैं,गुरु अभिभावक हैं,और शिव-शारण कौटुम्बिओं की भूमिका में हैं।
आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश के साथ अक्का ने विवस्त्र(naked)रहने का चुनाव किया।साहित्य में उसके इस चुनाव की घोर आलोचना मिलती है।पितृ-सत्तात्मक समाज में स्त्री की अनावृत्तता(nudity) को लेकर भरपूर हाय- तौबा हुई।समाज के लिए ये स्वीकार करना मुश्किल था कि अध्यात्म के मार्ग पर कोई स्त्री इतना आगे बढ़ सकती है कि वह अपने सारे सामाजिक-सांस्कारिक निषेधों से मुक्त हो जाए।विवस्त्रता के चुनाव के साथ अक्का महादेवी तत्कालीन सामाजिक एवं आध्यात्मिक दोनों हलकों में बागी के रूप में पहचानी गई।घूंघट के हिमायती समाज के लिए उसको स्वीकारना मुश्किल था।
_______________नीलिमा
(#प्रतिरोध के स्वर -02)
#her_story
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अक्का महादेवी 12वीं शताब्दी ईसवी के वीरशैव भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है।उसके नाम के साथ जुड़ा अक्का (बड़ी बहन)शब्द उसकी सम्मानजनक स्थिति का सांकेतिक सूचक है।अपने शुरुआती जीवन में अक्का महादेवी नें विवाह को प्राथमिकता देते हुए गृहस्थ जीवन चुना।किन्तु साथी के साथ असंगतता एवं अपमानजनक परिस्थितियों से वशीभूत उसने संबंध विच्छेद कर लिया।खुद को दिलासा देने के लिए उसने अध्यात्म की शरण ली।उसकी कविताओं का कौटुम्बिक भाव दर्शाता है कि कैसे वह अपने पारिवारिक जीवन की क्षतिपूर्ति करने के लिए प्रयासरत है।उसके भावोद्गार का सुंदर चित्रण एक वाचन में मिलता है जहां शिव पति हैं,गुरु अभिभावक हैं,और शिव-शारण कौटुम्बिओं की भूमिका में हैं।
आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश के साथ अक्का ने विवस्त्र(naked)रहने का चुनाव किया।साहित्य में उसके इस चुनाव की घोर आलोचना मिलती है।पितृ-सत्तात्मक समाज में स्त्री की अनावृत्तता(nudity) को लेकर भरपूर हाय- तौबा हुई।समाज के लिए ये स्वीकार करना मुश्किल था कि अध्यात्म के मार्ग पर कोई स्त्री इतना आगे बढ़ सकती है कि वह अपने सारे सामाजिक-सांस्कारिक निषेधों से मुक्त हो जाए।विवस्त्रता के चुनाव के साथ अक्का महादेवी तत्कालीन सामाजिक एवं आध्यात्मिक दोनों हलकों में बागी के रूप में पहचानी गई।घूंघट के हिमायती समाज के लिए उसको स्वीकारना मुश्किल था।
_______________नीलिमा
(#प्रतिरोध के स्वर -02)
#her_story
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