इतिहास में स्त्री
इतिहास में स्त्री - ग्यारह
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स्त्री की यौनिकता(sexuality)और उसकी अभिव्यक्ति को लेकर विभिन्न प्रकार के किस्से-कहानी,लानत-मलानत सभी पितृसत्तात्मक समाजों में व्याप्त मिलते हैं। जातक कथाएं भी इससे मुक्त नहीं है।जातकों के अनेक कथानक रानियों की अतृप्त कामेच्छा के इर्द-गिर्द बुनें गए हैं।इनमें रानी को व्यभिचारी,परपुरुषगामिनी स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।इस सन्दर्भ में बंधंमोक्ख जातक,चुल्लपदम् जातक ,पब्बतु पत्थर जातक,परंतप जातक,महापदुम जातक उल्लेखनीय हैं।
बंधंमोक्ख जातक एक दुश्चरित्र रानी की कथा है जो अपने पति से वफ़ादारी की अपेक्षा कर स्वयं उसे धोखा देती है।अनुपस्थित राजा द्वारा भेजे गए चौसठ संदेशवाहकों के साथ रानी द्वारा संसर्ग करने का उल्लेख जातक में है। राजपुरोहित (बोधिसत्व) रानी का पर्दाफाश राजा के सामने करता है।कथा के अंत में रानी को क्षमा कर दिया जाता है। जातक स्त्री स्वाभाव को विश्लेषित करते हुए कहता है कि 'स्त्रियां स्वाभाव से अतृप्त कामेच्छा वाली,लालची और दुश्चरित्र होती हैं। यह प्रवृति उनमें जन्म से होती है।वस्तुतः यह उनका प्रकृति प्रदत्त स्वाभाव है।' इसलिए रानी को क्षमा कर दिया जाता है।
पब्बतु पत्थर जातक कोशल के राजा से सम्बंधित है। जातक में बताया गया है कि राजा की प्रिय पत्नी का राज्य के किसी मंत्री के साथ प्रेम सम्बन्ध था।राजा अपनी इस समस्या के निदान के लिए गौतम बुद्ध के पास जेतवन आया।प्रसंगवश गौतम ने राजा को सलाह दी की 'यदि मंत्री राजनीति में उपयोगी है और रानी प्रिय तो दोनों को चेतावनी देकर छोड़ा देना चाहिए'।राजा ने बुद्ध की सलाह पर अम्ल किया।उल्लेखनीय है कि राजा की दरियादिली राजनीतिक लाभ से प्रेरित है।
परंतप जातक की कहानी रानी और उसके सेवक के बीच प्रेम संबंध की है। जातक में सेवक को मृत्यु दंड और रानी को घोर निंदा औरभत्सर्ना के पश्चात माफ़ कर दिया जाता है।
जातक धर्मशात्रीय निदर्श(मनुस्मृति इत्यादि) से इस मामले में भिन्न हैं की ये व्यभिचारिणी स्त्री के लिए कठोर दंड निर्धारित नहीं करते हैं।जातक बौद्ध नीतिशास्त्र पर विकसित होने की वजह से संघ में प्रविष्ट होने के विचार और सन्यासी जीवन शैली से प्रभावित दिखते हैं। वे स्त्रियों में सारे दुर्गुणों को आरोपित कर उन्हें संघ और सन्यासी जीवन के लिए बाधा मानते हैं और उनसे दूरी बरतने का सुझाव देते हैं।
_______________नीलिमा
#her_story
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स्त्री की यौनिकता(sexuality)और उसकी अभिव्यक्ति को लेकर विभिन्न प्रकार के किस्से-कहानी,लानत-मलानत सभी पितृसत्तात्मक समाजों में व्याप्त मिलते हैं। जातक कथाएं भी इससे मुक्त नहीं है।जातकों के अनेक कथानक रानियों की अतृप्त कामेच्छा के इर्द-गिर्द बुनें गए हैं।इनमें रानी को व्यभिचारी,परपुरुषगामिनी स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।इस सन्दर्भ में बंधंमोक्ख जातक,चुल्लपदम् जातक ,पब्बतु पत्थर जातक,परंतप जातक,महापदुम जातक उल्लेखनीय हैं।
बंधंमोक्ख जातक एक दुश्चरित्र रानी की कथा है जो अपने पति से वफ़ादारी की अपेक्षा कर स्वयं उसे धोखा देती है।अनुपस्थित राजा द्वारा भेजे गए चौसठ संदेशवाहकों के साथ रानी द्वारा संसर्ग करने का उल्लेख जातक में है। राजपुरोहित (बोधिसत्व) रानी का पर्दाफाश राजा के सामने करता है।कथा के अंत में रानी को क्षमा कर दिया जाता है। जातक स्त्री स्वाभाव को विश्लेषित करते हुए कहता है कि 'स्त्रियां स्वाभाव से अतृप्त कामेच्छा वाली,लालची और दुश्चरित्र होती हैं। यह प्रवृति उनमें जन्म से होती है।वस्तुतः यह उनका प्रकृति प्रदत्त स्वाभाव है।' इसलिए रानी को क्षमा कर दिया जाता है।
पब्बतु पत्थर जातक कोशल के राजा से सम्बंधित है। जातक में बताया गया है कि राजा की प्रिय पत्नी का राज्य के किसी मंत्री के साथ प्रेम सम्बन्ध था।राजा अपनी इस समस्या के निदान के लिए गौतम बुद्ध के पास जेतवन आया।प्रसंगवश गौतम ने राजा को सलाह दी की 'यदि मंत्री राजनीति में उपयोगी है और रानी प्रिय तो दोनों को चेतावनी देकर छोड़ा देना चाहिए'।राजा ने बुद्ध की सलाह पर अम्ल किया।उल्लेखनीय है कि राजा की दरियादिली राजनीतिक लाभ से प्रेरित है।
परंतप जातक की कहानी रानी और उसके सेवक के बीच प्रेम संबंध की है। जातक में सेवक को मृत्यु दंड और रानी को घोर निंदा औरभत्सर्ना के पश्चात माफ़ कर दिया जाता है।
जातक धर्मशात्रीय निदर्श(मनुस्मृति इत्यादि) से इस मामले में भिन्न हैं की ये व्यभिचारिणी स्त्री के लिए कठोर दंड निर्धारित नहीं करते हैं।जातक बौद्ध नीतिशास्त्र पर विकसित होने की वजह से संघ में प्रविष्ट होने के विचार और सन्यासी जीवन शैली से प्रभावित दिखते हैं। वे स्त्रियों में सारे दुर्गुणों को आरोपित कर उन्हें संघ और सन्यासी जीवन के लिए बाधा मानते हैं और उनसे दूरी बरतने का सुझाव देते हैं।
_______________नीलिमा
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