धर्म और संस्कृति

इंडोनेशिया में रामकथा-03
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रामायण की कहानी कब की है इसका इतिहास तो बिल्कुल अनभिज्ञ है पर मूल लेखक का इतिहास तक नही जाना जा सका।
वाल्मीकि मूल लेखक माने जाते हैं पर वो खुद कब हुए कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं।
निम्न पंक्तियों से अंदाजा लगाइये।
ऐसा कहा जाता है कि सर्वप्रथम शिव ने पार्वती को राम कथा सुनाई.. सबसे पहले हनुमान जी ने इसे लिखा एक चट्टान पर!! और इसे काव्य का रूप दिया वाल्मीकि ने!!
स्प्ष्ट है एक कहानी प्राचीन काल से जनश्रुतियों मे पीढ़ियों मे जिंदा रही फिर कभी लिपिबद्ध हुई।

निश्चित रूप से कथा व्यापक असर रखती थी समाज मे जो दर्जनों भाषाओं मे लिखी गयी जब लेखन सम्भव हुआ। नेपाल, मलेशिया, थाई, इंडोनेशिया, दक्षिण में तमिल तेलगु सभी भाषाओं में राम कथा उपलब्ध है और मूल पात्रों व कथा के अलावा काफी असमानता रखती हैं।
बौद्ध जातक मौखिक कथाओं मे राम कथा बिल्कुल भिन्न है जिसपर खूब विवाद हैं।
पर एक बात जानिए बौद्ध (2500 साल पूर्व) के समय ये जनश्रुतियों में ही थी.. यानी लेखन पद्धति उसके बाद विकसित हुई तो मूल रामायण काफी बाद में ही लिखी गयी।
खैर ऐतिहासिक पहलू जो हों पर रामायण हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
संस्कृति प्राण हैं और सभ्यताओं के विकास, मिलन, पलायन के साथ उसमे बदलाव विकास होते रहते हैं।

धर्म तो बहुत गौण हिस्सा है संस्कृति का इस उदाहरण से समझिये।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म अपनाया फिर उनके पौत्र अशोक बुद्ध के अनुयायी बने और अगली पीढियां निश्चित ही हिन्दू थीं क्योंकि बौद्ध धर्म नगण्य फैला भारत मे फिर उनमें से कितनो ने इस्लाम, आर्य समाजी ईसाई धर्म अपनाए कोई आंकड़ा नही।
अगर आप अपनी सभ्यता पूर्वजों का अध्यन करें तो वो विभिन्न धर्मों को मानने वाले रहे...हो सकता है अपनी अगली पीढियां कोई और धर्म अपना लें या नास्तिक हों।

पर एक बात तय है हमेशा भारतीय थे हैं और रहेंगे.. वो भी जो बाहर से कभी पलायन करके आये शुद्ध भारतीय हैं।
अगर आप वो बाहरी ये यहीं का मे ऊर्जा जाया कर विभाजित होते हैं तो जान लें... विज्ञान का मत है कि समस्त मानव जाति अफ्रीका से संसार मे फैली।
बस इतना सा जान लें धर्म के आधार पर संस्कृति की दुहाई देने वाले असली दुश्मन हैं स्वस्थ समरसता मानवीय संस्कृति विकास, देश और समाज के....न.रुक

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