प्रतिरोध के स्वर
#प्रतिरोध के स्वर-03
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महाभारत में प्रतिरोध के स्वर दर्ज़ कराने वाली स्त्रियों में हिडिम्बा,परद्वेषी और अनुसुया महत्वपूर्ण हैं।हिडिम्बा और परद्वेषी का उल्लेख आदि पर्व में मिलता है। भीम के द्वारा अपने भाई हिडिम्बासुर का वध किए जाने पर हिडिम्बा कुंती से अनुरोध करती है कि वह उसे अपने वंश की परंपरा को चलाए रखने के लिए भीम से विवाह करने की अनुमति दे। यह अनुमति वह सशर्त मांगती है कि,' वह पुत्र प्राप्ति तक ही भीम से संबंध रखेगी उसके बाद नहीं'। परद्वेषी का उल्लेख भी आदि पर्व में ही मिलता है। वह दृघतमास की सुंदर युवा पत्नी है। दृघतमास के नेत्रहीन होने के बावजूद उनकी विद्वता से प्रभावित होकर उसने विवाह किया था। नियोग की वैधानिकता को देखते हुए दृघतमास मर्यादा का ख्याल किए बिना ऐसे संबंधों में लिप्त होने लगे।परद्वेषी ने इसका प्रबल विरोध किया और उनकी देखभाल करने में असमर्थतता जताई।
अनुसुया अत्रि ऋषि की पत्नी है।उसका उल्लेख अनुशासन पर्व में मिलता है। वह शिव से वरदान प्राप्त करती है कि, पति के सहयोग के बिना भी उसे पुत्र- रत्न की प्राप्ति हो,जो उसके नाम से जाना जाएगा और उसकी वंश वृद्धि करेगा।यह अपने आप में महत्वपूर्ण संदर्भ है। भले ही यहाँ पुत्र संतान को महत्वपूर्ण माना गया है लेकिन पति की भूमिका के बिना उसकी प्राप्ति और उसका माता के वंश की वृद्धि करना क्रन्तिकारी प्रतीत होता है। धर्मशास्त्रों में पुत्र संतान पिता के वंश की वृद्धि करने वाली,पिता को पूर्वजों के ऋण से उऋण करने वाली बताई गई है।माता-पुत्र के ऐसे संदर्भ धर्मशास्त्रों में नहीं हैं।
________नीलिमा
#इतिहास_में_स्त्री -16
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महाभारत में प्रतिरोध के स्वर दर्ज़ कराने वाली स्त्रियों में हिडिम्बा,परद्वेषी और अनुसुया महत्वपूर्ण हैं।हिडिम्बा और परद्वेषी का उल्लेख आदि पर्व में मिलता है। भीम के द्वारा अपने भाई हिडिम्बासुर का वध किए जाने पर हिडिम्बा कुंती से अनुरोध करती है कि वह उसे अपने वंश की परंपरा को चलाए रखने के लिए भीम से विवाह करने की अनुमति दे। यह अनुमति वह सशर्त मांगती है कि,' वह पुत्र प्राप्ति तक ही भीम से संबंध रखेगी उसके बाद नहीं'। परद्वेषी का उल्लेख भी आदि पर्व में ही मिलता है। वह दृघतमास की सुंदर युवा पत्नी है। दृघतमास के नेत्रहीन होने के बावजूद उनकी विद्वता से प्रभावित होकर उसने विवाह किया था। नियोग की वैधानिकता को देखते हुए दृघतमास मर्यादा का ख्याल किए बिना ऐसे संबंधों में लिप्त होने लगे।परद्वेषी ने इसका प्रबल विरोध किया और उनकी देखभाल करने में असमर्थतता जताई।
अनुसुया अत्रि ऋषि की पत्नी है।उसका उल्लेख अनुशासन पर्व में मिलता है। वह शिव से वरदान प्राप्त करती है कि, पति के सहयोग के बिना भी उसे पुत्र- रत्न की प्राप्ति हो,जो उसके नाम से जाना जाएगा और उसकी वंश वृद्धि करेगा।यह अपने आप में महत्वपूर्ण संदर्भ है। भले ही यहाँ पुत्र संतान को महत्वपूर्ण माना गया है लेकिन पति की भूमिका के बिना उसकी प्राप्ति और उसका माता के वंश की वृद्धि करना क्रन्तिकारी प्रतीत होता है। धर्मशास्त्रों में पुत्र संतान पिता के वंश की वृद्धि करने वाली,पिता को पूर्वजों के ऋण से उऋण करने वाली बताई गई है।माता-पुत्र के ऐसे संदर्भ धर्मशास्त्रों में नहीं हैं।
________नीलिमा
#इतिहास_में_स्त्री -16
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