राम कथा और हम
#राम कथा और हम (पोस्ट संख्या-03)
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राम कथा के जो शुरूआती पाठ मिलते हैं उनमें राम की कल्पना एक वीर योद्धा के रूप में की गई है।वाल्मीकि ने रामकथा का जो रूप गढ़ा वह तुलनात्मक रूप से अधिक व्यवस्थित और रोचक है किंतु राम कथा का यही एक अकेला पाठ नहीं है।इस कथा के अन्य अनेक रूप मौजूद हैं,सीता इन सभी का अभिन्न हिस्सा हैं। राम कथा का बौद्ध पाठ हमें एक जातक के रूप में मिलता है। इसकी खासियत सीता का उल्लेख क्रमशः राम की बहन और पत्नी के रूप में किया जाना है। यह जातक राम कथा का प्राचीनतम लिपिबद्ध रूप है। अन्य सभी जातकों की भांति राम यहाँ बोधिसत्व हैं,उनके पिता का नाम दशरथ है जो बनारस के शासक हैं। गौरतलब है जातकों में सर्वाधिक उल्लेख बनारस शहर का है जिसका शासक बार-बार ब्रह्मदत्त बताया गया है। दशरथ जातक में भी रामकथा की तरह राम की विमाता के षड़यंत्र का उल्लेख है जो अपने पुत्र भरत को युवराज घोषित का करवाने के लिए कटिबद्ध है।राजपरिवार के कुचक्रों से बचाने के लिए पिता दशरथ अपने अन्य बच्चों राम, लक्ष्मण और सीता को राज्य से बारह बरस के लिए निकाल देते हैं।बारह बरस के बनवास से लौटकर राम सीता से ब्याह करते हैं और दीर्घकाल तक शासन करते हैं।
इस जातक की कथा कई बार हिंसक विवाद का कारण बनी। वजह ये की इसमें रामकथा को विकृत किया गया है जिससे हिन्दू धर्म की अस्मिता को ठेस पहुँचती है।
वास्तविकता इससे परे है। दशरथ जातक ऐसी किसी मंशा से नहीं लिखा गया है। जातक कथाएं गौतम बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएं हैं जब वे बोधिसत्व के रूप में जन्म ले रहे थे। गौतम का सम्बन्ध एवं संपर्क शाक्य एवं लिच्छवी गण से था। शाक्यों तथा लिच्छिवियों में भाई-बहन के बीच विवाह की अनेक कथाएं हमें शुरूआती पालि पाठों में मिलती हैं।इन विवाहों का उद्देश्य रक्त की शुद्धता को बनाए रखना था। बौद्ध ग्रन्थ दिघ्घनिकाय में भी इससे संबंधित कथा मिलती है। इन मिथकों को कौटुम्बिक व्यभिचार (incest) नहीं कहा जा सकता।परवर्ती काल की नैतिकता एवं सामाजिक मानदंडों को पूर्ववर्ती काल के मिथकों पर नहीं थोपना चाहिए। इन मिथकों को अपने समय के प्रयोजन के निम्मित गढ़ा गया था। हर काल और समाज की अपनी पृथक मान्यताएं और नैतिकताएं होती हैं। उन्हें न तो अपने समय के चश्में से देखना चाहिए न विश्लेषित करना चाहिए।ऐसा करने से दृष्टि दोष का खतरा रहता है।
_____________नीलिमा
#debates_in_history
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राम कथा के जो शुरूआती पाठ मिलते हैं उनमें राम की कल्पना एक वीर योद्धा के रूप में की गई है।वाल्मीकि ने रामकथा का जो रूप गढ़ा वह तुलनात्मक रूप से अधिक व्यवस्थित और रोचक है किंतु राम कथा का यही एक अकेला पाठ नहीं है।इस कथा के अन्य अनेक रूप मौजूद हैं,सीता इन सभी का अभिन्न हिस्सा हैं। राम कथा का बौद्ध पाठ हमें एक जातक के रूप में मिलता है। इसकी खासियत सीता का उल्लेख क्रमशः राम की बहन और पत्नी के रूप में किया जाना है। यह जातक राम कथा का प्राचीनतम लिपिबद्ध रूप है। अन्य सभी जातकों की भांति राम यहाँ बोधिसत्व हैं,उनके पिता का नाम दशरथ है जो बनारस के शासक हैं। गौरतलब है जातकों में सर्वाधिक उल्लेख बनारस शहर का है जिसका शासक बार-बार ब्रह्मदत्त बताया गया है। दशरथ जातक में भी रामकथा की तरह राम की विमाता के षड़यंत्र का उल्लेख है जो अपने पुत्र भरत को युवराज घोषित का करवाने के लिए कटिबद्ध है।राजपरिवार के कुचक्रों से बचाने के लिए पिता दशरथ अपने अन्य बच्चों राम, लक्ष्मण और सीता को राज्य से बारह बरस के लिए निकाल देते हैं।बारह बरस के बनवास से लौटकर राम सीता से ब्याह करते हैं और दीर्घकाल तक शासन करते हैं।
इस जातक की कथा कई बार हिंसक विवाद का कारण बनी। वजह ये की इसमें रामकथा को विकृत किया गया है जिससे हिन्दू धर्म की अस्मिता को ठेस पहुँचती है।
वास्तविकता इससे परे है। दशरथ जातक ऐसी किसी मंशा से नहीं लिखा गया है। जातक कथाएं गौतम बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएं हैं जब वे बोधिसत्व के रूप में जन्म ले रहे थे। गौतम का सम्बन्ध एवं संपर्क शाक्य एवं लिच्छवी गण से था। शाक्यों तथा लिच्छिवियों में भाई-बहन के बीच विवाह की अनेक कथाएं हमें शुरूआती पालि पाठों में मिलती हैं।इन विवाहों का उद्देश्य रक्त की शुद्धता को बनाए रखना था। बौद्ध ग्रन्थ दिघ्घनिकाय में भी इससे संबंधित कथा मिलती है। इन मिथकों को कौटुम्बिक व्यभिचार (incest) नहीं कहा जा सकता।परवर्ती काल की नैतिकता एवं सामाजिक मानदंडों को पूर्ववर्ती काल के मिथकों पर नहीं थोपना चाहिए। इन मिथकों को अपने समय के प्रयोजन के निम्मित गढ़ा गया था। हर काल और समाज की अपनी पृथक मान्यताएं और नैतिकताएं होती हैं। उन्हें न तो अपने समय के चश्में से देखना चाहिए न विश्लेषित करना चाहिए।ऐसा करने से दृष्टि दोष का खतरा रहता है।
_____________नीलिमा
#debates_in_history
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