धर्म और संस्कृति
इंडोनेशिया में राम कथा-01
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क्या दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी की संस्कृति रामायण हो सकती है!! इंडोनेशिया की कुल आबादी 24 करोड़ का 90% मुस्लिम हैं।
इंडोनेशिया के शिक्षा और संस्कृति मंत्री अनीस बास्वेदन भारत आए थे. इस यात्रा के दौरान उनके एक बयान ने खास तौर पर सुर्खियां बटोरीं. अनीस का कहना था, ‘हमारी रामायण दुनिया भर में मशहूर है। हम चाहते हैं भारत के कलाकार इंडोनेशिया आ कर रामलीला मंचन करें और हमारे यहां, इससे रामायण की साझा संस्कृति का विकास होगा।
इंडोनेशिया मे नियमित रामलीला मंचन होता है। वहां रामायण 7 वीं सदी मे आई और अगर तबसे रामलीला मंचन हो रहा है तो भारत से बहुत पुराना है रामलीला मंचन!! भारत मे तो रामलीला तुलसीदास के बाद ही खेली जाने लगी और विधिवत मंचन तो कहते हैं बहादुरशाह जफ़र ने ही शुरू करवाया दिल्ली रामलीला मैदान मे।
इंडोनेशियन स्कूल शिक्षा मे रामायण पढाई जाती है।
एक किस्सा है।
इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो के समय में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया पहुंचा तो उन्हें मुस्लिम देश मे रामायण मंचन देखकर हैरानी हुई।
तो सुकर्णो ने कहा कि इस्लाम हमारा धर्म है और रामायण हमारी संस्कृति!
इंडोनेशियन मुस्लिमों का कहना है वो बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं!!
और हमारे यहां रामायण और राम लला वाले ??
कैसे इंसान हैं रामायण पढ़कर!!
रामलला के ठेकेदारों ने पिछले 3 दसक मे जय श्री राम को एक उग्र उदघोष बना दिया है!!
संस्कृति!!
संस्कृति के नाम पर इतिहास मिटाते हैं, विरासत मे मिली इमारतों पर बुलडोजर फिरवाने की बात करते हैं।
धर्म और संस्कृति वाकई दो अलग अलग विषय हैं।
और संस्कृति की दुहाई देने वाले हमारे (कु)सांस्कृतिक दल को सीखना चाहिए कि सत्ता की गन्दी धर्म की राजनीति के चलते वो भारत के धर्म और सांस्कृतिक विरासत को कितना जहरी बना चुके हैं। रामलला उन्हें माफ करें वो नही जानते वो धर्म देश और संस्कृति के असली दुश्मन हैं.....
- जी. एस. नरुका
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क्या दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी की संस्कृति रामायण हो सकती है!! इंडोनेशिया की कुल आबादी 24 करोड़ का 90% मुस्लिम हैं।
इंडोनेशिया के शिक्षा और संस्कृति मंत्री अनीस बास्वेदन भारत आए थे. इस यात्रा के दौरान उनके एक बयान ने खास तौर पर सुर्खियां बटोरीं. अनीस का कहना था, ‘हमारी रामायण दुनिया भर में मशहूर है। हम चाहते हैं भारत के कलाकार इंडोनेशिया आ कर रामलीला मंचन करें और हमारे यहां, इससे रामायण की साझा संस्कृति का विकास होगा।
इंडोनेशिया मे नियमित रामलीला मंचन होता है। वहां रामायण 7 वीं सदी मे आई और अगर तबसे रामलीला मंचन हो रहा है तो भारत से बहुत पुराना है रामलीला मंचन!! भारत मे तो रामलीला तुलसीदास के बाद ही खेली जाने लगी और विधिवत मंचन तो कहते हैं बहादुरशाह जफ़र ने ही शुरू करवाया दिल्ली रामलीला मैदान मे।
इंडोनेशियन स्कूल शिक्षा मे रामायण पढाई जाती है।
एक किस्सा है।
इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो के समय में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया पहुंचा तो उन्हें मुस्लिम देश मे रामायण मंचन देखकर हैरानी हुई।
तो सुकर्णो ने कहा कि इस्लाम हमारा धर्म है और रामायण हमारी संस्कृति!
इंडोनेशियन मुस्लिमों का कहना है वो बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं!!
और हमारे यहां रामायण और राम लला वाले ??
कैसे इंसान हैं रामायण पढ़कर!!
रामलला के ठेकेदारों ने पिछले 3 दसक मे जय श्री राम को एक उग्र उदघोष बना दिया है!!
संस्कृति!!
संस्कृति के नाम पर इतिहास मिटाते हैं, विरासत मे मिली इमारतों पर बुलडोजर फिरवाने की बात करते हैं।
धर्म और संस्कृति वाकई दो अलग अलग विषय हैं।
और संस्कृति की दुहाई देने वाले हमारे (कु)सांस्कृतिक दल को सीखना चाहिए कि सत्ता की गन्दी धर्म की राजनीति के चलते वो भारत के धर्म और सांस्कृतिक विरासत को कितना जहरी बना चुके हैं। रामलला उन्हें माफ करें वो नही जानते वो धर्म देश और संस्कृति के असली दुश्मन हैं.....
- जी. एस. नरुका
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