धर्म और संस्कृति
इंडोनेशिया में रामकथा-02
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इंडोनेशिया के लोगों का कहना है हमने धर्म बदला है पूर्वज नहीं। 13 वीं शताब्दी मे अरब वहां व्यापार के लिए आये शुरुआती दौर मे सामन्तो व्यापारियों ने ही धर्म परिवर्तन किया, आपसी शादियां रिश्ते। आज वहाँ 90% मुस्लिम हैं। इंडोनेशियन को अरबी बनने का कोई शौक नहीं वो सिर्फ इंडोनेशियन हैं।
उनके नाम हिन्दू मुस्लिम मिश्रण वाले हैं। बाली द्वीप महाभारत रामायण पात्रों की कथा कहती मूर्तियों से भरा पड़ा है। वहां के पब्लिक प्लेस, हॉल, मॉल का नाम भीम अर्जुन युधिष्ठिर राम सीता आदि पात्रों पर होते हैं।
स्कूली शिक्षा मे तो रामायण महाभारत है ही।
वहां के लोग बड़े विनम्र पारिवारिक सामाजिक हैं। गांव शहरों मे अदभुद समरसता प्रेमपूर्ण वातावरण है।
विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम देश मे ऐसी संस्कृति अजूबे से कम नही खासतौर से तब! जब पूरे विश्व मे रेडिकल इस्लाम का प्रभाव बढ़ा है पिछले कुछ दसक मे।
इंडोनेशियन इस्लाम विश्व के लिए तो सबक है ही भारतीय मुस्लिमों के लिए भी।
निश्चित रूप से इंडोनेशियन मुस्लिमों के बाद भारतीय मुस्लिम भी अपनी समरसता और प्रेम के लिए जाने जाते हैं। भारतीय मुस्लिमो की इस्लामिक स्टेट मे भागीदारी नगण्य है कभी मुश्किल से कोई युवा भटकते हैं।
पर भारतीय मुस्लिम निश्चित रूप से खुद को अरबी कहलाना पसंद करते हैं और अरबी संस्कृति को श्रेष्ठ मानते हैं जबकि अनुमान अनुसार 60% से अधिक मुस्लिम पूर्व हिन्दू ही हैं जिन्होंने धर्म बदला संस्कृति कैसे बदल सकती है।
संस्कृति तो विभिन्न सभ्यताओं के मिश्रण से दूध और पानी की तरह घुल मिल जाती है।
जिसे हम गंगा जमुनी संस्कृति कहते हैं।
संस्कृति के आगे धर्म तो कुछ नहीं इस उदाहरण से समझें।
भारतीय संस्कृति से ही जैन, बौद्ध, सिक्ख निकले.. इनकी संस्कृति एक है नाम से लेकर रीतिरिवाजों तक। संस्कृति निरन्तर गतिमान है परस्पर मिश्रण से नया रूप लेती रहती है।
विशाल देश भारत मे आज गुजराती गरबा हर कोने में है... पंजाबी गीत भंगड़ा हर क्षेत्र धर्म जाती के लोगों में लोकप्रिय हैं।
सूफी इस्लाम की उत्तपत्ति दरगाहों मे जगमग दीपावली मनती है।
ये हमारी संस्कृति नही वो हमारा इतिहास नही!! रेडिकल हिंदुइज्म या इस्लाम सिर्फ खुद की सभ्यता देश और संस्कृति के दुश्मन होने के साथ मानवता को नुकसान पहुंचा एक नफरत से भरा असहिष्णु समाज बनाते हैं जो खुद की जड़ों को ही खोखला करते हैं....
-जी.एस. नरुका
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इंडोनेशिया के लोगों का कहना है हमने धर्म बदला है पूर्वज नहीं। 13 वीं शताब्दी मे अरब वहां व्यापार के लिए आये शुरुआती दौर मे सामन्तो व्यापारियों ने ही धर्म परिवर्तन किया, आपसी शादियां रिश्ते। आज वहाँ 90% मुस्लिम हैं। इंडोनेशियन को अरबी बनने का कोई शौक नहीं वो सिर्फ इंडोनेशियन हैं।
उनके नाम हिन्दू मुस्लिम मिश्रण वाले हैं। बाली द्वीप महाभारत रामायण पात्रों की कथा कहती मूर्तियों से भरा पड़ा है। वहां के पब्लिक प्लेस, हॉल, मॉल का नाम भीम अर्जुन युधिष्ठिर राम सीता आदि पात्रों पर होते हैं।
स्कूली शिक्षा मे तो रामायण महाभारत है ही।
वहां के लोग बड़े विनम्र पारिवारिक सामाजिक हैं। गांव शहरों मे अदभुद समरसता प्रेमपूर्ण वातावरण है।
विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम देश मे ऐसी संस्कृति अजूबे से कम नही खासतौर से तब! जब पूरे विश्व मे रेडिकल इस्लाम का प्रभाव बढ़ा है पिछले कुछ दसक मे।
इंडोनेशियन इस्लाम विश्व के लिए तो सबक है ही भारतीय मुस्लिमों के लिए भी।
निश्चित रूप से इंडोनेशियन मुस्लिमों के बाद भारतीय मुस्लिम भी अपनी समरसता और प्रेम के लिए जाने जाते हैं। भारतीय मुस्लिमो की इस्लामिक स्टेट मे भागीदारी नगण्य है कभी मुश्किल से कोई युवा भटकते हैं।
पर भारतीय मुस्लिम निश्चित रूप से खुद को अरबी कहलाना पसंद करते हैं और अरबी संस्कृति को श्रेष्ठ मानते हैं जबकि अनुमान अनुसार 60% से अधिक मुस्लिम पूर्व हिन्दू ही हैं जिन्होंने धर्म बदला संस्कृति कैसे बदल सकती है।
संस्कृति तो विभिन्न सभ्यताओं के मिश्रण से दूध और पानी की तरह घुल मिल जाती है।
जिसे हम गंगा जमुनी संस्कृति कहते हैं।
संस्कृति के आगे धर्म तो कुछ नहीं इस उदाहरण से समझें।
भारतीय संस्कृति से ही जैन, बौद्ध, सिक्ख निकले.. इनकी संस्कृति एक है नाम से लेकर रीतिरिवाजों तक। संस्कृति निरन्तर गतिमान है परस्पर मिश्रण से नया रूप लेती रहती है।
विशाल देश भारत मे आज गुजराती गरबा हर कोने में है... पंजाबी गीत भंगड़ा हर क्षेत्र धर्म जाती के लोगों में लोकप्रिय हैं।
सूफी इस्लाम की उत्तपत्ति दरगाहों मे जगमग दीपावली मनती है।
ये हमारी संस्कृति नही वो हमारा इतिहास नही!! रेडिकल हिंदुइज्म या इस्लाम सिर्फ खुद की सभ्यता देश और संस्कृति के दुश्मन होने के साथ मानवता को नुकसान पहुंचा एक नफरत से भरा असहिष्णु समाज बनाते हैं जो खुद की जड़ों को ही खोखला करते हैं....
-जी.एस. नरुका
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