प्रतिरोध के स्वर
एक थी अम्बा
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महाभारत की आर्य स्त्रियों में अम्बा का प्रतिरोध सर्वाधिक उल्लेखनीय है।अम्बा का उल्लेख उसकी दो छोटी बहनों अम्बिका और अम्बालिका के साथ उनके सामुहिक स्वयंवर के अवसर पर आता है। वह काशी नरेश की पुत्री है।उसका व उसकी बहनों का अपहरण भीष्म ने सरेआम उनके स्वयंवर समारोह से कर लिया। बलपूर्वक अपहरण का उद्देश्य अनुज विचित्र वीर्य से उनका विवाह करवाना था। हस्तिनापुर पहुँच कर तीनों बहनों में बड़ी अम्बा ने भीष्म की इस हरकत का विरोध किया और तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए विवाह करने से मना कर दिया। शेष दो बहनों ने विचित्र वीर्य से विवाह कर लिया। अम्बा अपनी प्रतिक्रिया में बहुत ही स्पष्टता से क्षत्रिय कुल में प्रचलित स्वयंवर की प्रथा की आलोचना करती है।जहाँ वास्तविकता में स्त्री को वर चुनने का अधिकार नहीं है।सीता और द्रौपदी के स्वयंवर इस संदर्भ में उल्लेखनीय हैं।ये दोनों शर्त में बंधे आयोजन थे।शर्त पूरी करने वाले से ही सीता और द्रौपदी के विवाह सम्भव थे। ये नायिकाओं के व्यक्तिगत चुनाव नहीं थे।भीष्म के साथ-साथ अम्बा अपने पिता काशी नरेश को भी धिक्कारती है और उन्हें अपनी दयनीय दशा के लिए जिम्मेदार ठहरती है। वह कहती है, ' स्त्री मात्र एक बिकाऊ वस्तु बनकर रह गई है ,जिसे किसी भी शक्तिशाली, वर्चस्वशाली पुरुष के द्वारा हथियाया जा सकता है'।अम्बा स्त्री के अधिकारों के हनन के प्रति जागरूक दिखती है और उसका विरोध भी करती है।ये अलग बात है कि जिस शाल्व के अनुराग के लिए उसने भीष्म की आलोचना की ,विचित्र वीर्य से विवाह के प्रस्ताव को ठुकराया उसी शाल्व ने भीष्म से युद्ध में पराजित होने का बदला अम्बा से लिया और वापस लौटी अम्बा को अस्वीकार कर दिया।प्रतिशोध की आग में जलती हुई अम्बा ने बारह वर्षों तक कठोर तप किया और शिव से भीष्म के विनाश का वरदान प्राप्त किया।
________________नीलिमा
(#प्रतिरोध के स्वर-01)
#her_story
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महाभारत की आर्य स्त्रियों में अम्बा का प्रतिरोध सर्वाधिक उल्लेखनीय है।अम्बा का उल्लेख उसकी दो छोटी बहनों अम्बिका और अम्बालिका के साथ उनके सामुहिक स्वयंवर के अवसर पर आता है। वह काशी नरेश की पुत्री है।उसका व उसकी बहनों का अपहरण भीष्म ने सरेआम उनके स्वयंवर समारोह से कर लिया। बलपूर्वक अपहरण का उद्देश्य अनुज विचित्र वीर्य से उनका विवाह करवाना था। हस्तिनापुर पहुँच कर तीनों बहनों में बड़ी अम्बा ने भीष्म की इस हरकत का विरोध किया और तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए विवाह करने से मना कर दिया। शेष दो बहनों ने विचित्र वीर्य से विवाह कर लिया। अम्बा अपनी प्रतिक्रिया में बहुत ही स्पष्टता से क्षत्रिय कुल में प्रचलित स्वयंवर की प्रथा की आलोचना करती है।जहाँ वास्तविकता में स्त्री को वर चुनने का अधिकार नहीं है।सीता और द्रौपदी के स्वयंवर इस संदर्भ में उल्लेखनीय हैं।ये दोनों शर्त में बंधे आयोजन थे।शर्त पूरी करने वाले से ही सीता और द्रौपदी के विवाह सम्भव थे। ये नायिकाओं के व्यक्तिगत चुनाव नहीं थे।भीष्म के साथ-साथ अम्बा अपने पिता काशी नरेश को भी धिक्कारती है और उन्हें अपनी दयनीय दशा के लिए जिम्मेदार ठहरती है। वह कहती है, ' स्त्री मात्र एक बिकाऊ वस्तु बनकर रह गई है ,जिसे किसी भी शक्तिशाली, वर्चस्वशाली पुरुष के द्वारा हथियाया जा सकता है'।अम्बा स्त्री के अधिकारों के हनन के प्रति जागरूक दिखती है और उसका विरोध भी करती है।ये अलग बात है कि जिस शाल्व के अनुराग के लिए उसने भीष्म की आलोचना की ,विचित्र वीर्य से विवाह के प्रस्ताव को ठुकराया उसी शाल्व ने भीष्म से युद्ध में पराजित होने का बदला अम्बा से लिया और वापस लौटी अम्बा को अस्वीकार कर दिया।प्रतिशोध की आग में जलती हुई अम्बा ने बारह वर्षों तक कठोर तप किया और शिव से भीष्म के विनाश का वरदान प्राप्त किया।
________________नीलिमा
(#प्रतिरोध के स्वर-01)
#her_story
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